हिमाचली खबर: लंच हो या डिनर, हर भारतीय घर में एक बहस अक्सर होती है आज दालचावल बनेगा या रोटीसब्जी? हममें से ज्यादातर लोग स्वाद या सहूलियत के हिसाब से अपनी थाली चुनते हैं, लेकिन क्या आपकी यह थाली वाकई आपको पूरी सेहत दे पा रही है? देश की सबसे बड़ी फूड सेफ्टी संस्था FSSAI ने अब इस उलझन को हमेशा के लिए सुलझा दिया है। FSSAI ने एक ‘सेहतमंद भारतीय थाली’ का जिक्र करते हुए एक्स अकाउंट पर पूछा है कि आपकी थाली का सबसे बड़ा हिस्सा असल में किस चीज का होना चाहिए।

दाल-चावल या रोटी-सब्जी? FSSAI ने बताया सेहतमंद थाली का असली फॉर्मूला; जानिए सबसे बड़ा हिस्सा किसका होना चाहिए​
दाल-चावल या रोटी-सब्जी? FSSAI ने बताया सेहतमंद थाली का असली फॉर्मूला; जानिए सबसे बड़ा हिस्सा किसका होना चाहिए​

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण का मकसद देश के नागरिकों को कुपोषण, मोटापा और बीमारियों से बचाने के लिए एक आदर्श और संतुलित थाली का वैज्ञानिक फॉर्मूला शेयर करना है। लोग अक्सर असमंजस में रहते हैं कि थाली में रोटीचावल ज्यादा होना चाहिए या दालसब्जी। FSSAI ने अपने एक्स पोस्ट में एक अहम सवाल पूछाक्या आप जानते हैं कि एक स्वस्थ वयस्क की थाली में सबसे बड़ा हिस्सा किस फूड ग्रुप का होना चाहिए? आइए FSSAI  के इस सवाल का जवाब हेल्थ एक्सपर्ट से लेते हैं। जानते हैं कि हमारी थाली का बड़ा पोर्शन किस फूड से कवर होना चाहिए।

हमारी थाली का बड़ा पोर्शन कवर करने वाले फूड

गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन विभाग की वाइस चेयरपर्सन डॉ. सुशीला कटारिया का मानना है कि हेल्दी प्लेट का कॉन्सेप्ट संतुलित पोषण को बढ़ावा देने और लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों को रोकने का एक प्रभावी तरीका है। FSSAI के सवाल का जवाब देते हुए डॉ. कटारिया ने कहा कि एक हेल्दी वयस्क की थाली में सबसे बड़ा हिस्सा सब्जियों का होना चाहिए। साथ ही फलों को भी थाली में शामिल करना आदर्श माना जाता है। एक्सपर्ट ने बताया फल और सब्जियों का सेवन बॉडी को फाइबर, जरूरी विटामिन,मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देते हैं जो हमारी इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं, पाचन को दुरुस्त करते हैं और ओवर ऑल हेल्थ में सुधार करते हैं।

  • थाली में और क्या होना चाहिए?

डॉ. कटारिया ने बताया थाली में फल और सब्जियों के अलावा साबुत अनाज और प्रोटीन को शामिल करना भी जरूरी है। साबुत अनाज जैसे बाजरा, साबुत गेहूं और ब्राउन राइस शरीर को लंबे समय तक एनर्जेटिक रखते हैं। वहीं प्रोटीन के स्रोत जैसे बीन्स, दालें, दूध और दूध से बने पदार्थ, अंडे, मछली और कम वसा वाला मांस मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने और मेटाबॉलिक सेहत में सुधार करने में मददगार साबित होता है।

हेल्दी फूड के साथ ही पोर्शन भी रखता है मायने

डॉ. कटारिया बताती हैं कि आजकल मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इनमें से अधिकांश समस्याएं खराब खानपान की आदतों से जुड़ी होती हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक सिर्फ हेल्दी फूड्स का सेवन ही जरूरी नहीं है, बल्कि भोजन की मात्रा और उसे तैयार करने के तरीके भी उतने ही मायने रखते हैं। ताजे फूड और कम प्रोसेस फूड्स का सेवन सेहत के लिए उपयोगी है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतें उम्र, जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों के स्तर पर निर्भर करती हैं। शारीरिक रूप से अधिक मेहनत करने वाले व्यक्ति को डेस्क जॉब करने वाले व्यक्ति की तुलना में अधिक कैलोरी की आवश्यकता हो सकती है।

इसी तरह उम्र बढ़ने के साथ भी शरीर की जरूरतें बदलती रहती हैं। युवा लोग कार्बोहाइड्रेट को अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकते हैं, जबकि बुजुर्गों को मांसपेशियों के संरक्षण के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। हेल्दी प्लेट की अवधारणा लोगों को रोजाना बेहतर भोजन चुनने में मदद करने वाला एक सरल विजुअल गाइड है, लेकिन इसे किसी सख्त नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई स्वास्थ्य संबंधी दिनचर्या को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।