सीएम सुक्खू ने कर दिया बड़ा ऐलान, बताया कब होगा मंत्रिमंडल विस्तार, विभागों में भी होगा फेरबदल!

सीएम सुक्खू के बयान के बाद हिमाचल कांग्रेस की सियासत में हलचल

सोलन। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सुक्खू सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के एक बयान ने लंबे समय से चल रही अटकलों को नई हवा दे दी है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि सरकार के चार साल पूरे होने से पहले मंत्रिमंडल का विस्तार करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की संभावना भी सामने आई है। इससे हिमाचल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की चर्चा है।

सोलन के कोठों में आयोजित उच्च शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम में पहुंचे मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चा चल रही है और 11 दिसंबर से पहले इसे करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का चार साल का कार्यकाल 11 दिसंबर को पूरा होगा। ऐसे में मुख्यमंत्री के इस बयान को विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

अब तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कभी संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर चर्चा होती रही तो कभी विभागों में बड़े बदलाव की अटकलें सामने आती रहीं। लेकिन मुख्यमंत्री के ताजा बयान के बाद इस मुद्दे ने फिर जोर पकड़ लिया है।

यह भी पढ़ें :

मुख्यमंत्री ने साफ किया कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ विभागों में भी बदलाव हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस विधायक को मंत्री बनाया जाएगा और कौनसा विभाग किस मंत्री से लेकर दूसरे को दिया जा सकता है। यानी फिलहाल नामों और विभागों को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन सरकार के भीतर बदलाव की कवायद चलने का संकेत मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से दे दिया है।

हिमाचल सरकार के मौजूदा मंत्रिमंडल में इस समय एक मंत्री पद खाली है। इसके अलावा विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद भी रिक्त है। ऐसे में संभावित विस्तार को लेकर कांग्रेस विधायकों की नजर अब मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिक गई है। इससे पहले भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक हलकों में कई नाम चर्चा में रहे हैं। सितंबर की शुरुआत में मुख्यमंत्री द्वारा पार्टी हाईकमान से इस मुद्दे पर चर्चा किए जाने की खबरें सामने आई थीं।

यह भी पढ़ें :

हालांकि बाद में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को लेकर भी कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं सामने आईं। ऐसे में अंतिम फैसला केवल खाली पद भरने तक सीमित रहेगा या मंत्रियों के विभागों और मौजूदा चेहरों में भी बदलाव होगा, इस पर अब सबकी नजर है।

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ विभागों में बड़े फेरबदल की संभावना ने चर्चा को और दिलचस्प बना दिया है। मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जाएगा। अगर विभागों का पुनर्वितरण होता है तो इसका असर सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं के साथसाथ कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सरकार की ओर से यह नहीं बताया गया है कि कौनसे विभागों में बदलाव प्रस्तावित है। ऐसे में कांग्रेस के भीतर मंत्री पद की दौड़ के साथसाथ मौजूदा मंत्रियों के विभागों को लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

यह भी पढ़ें :

सुक्खू सरकार के चार साल 11 दिसंबर को पूरे होने हैं। मुख्यमंत्री का यह कहना कि उससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार की कोशिश की जाएगी, इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकार अपने कार्यकाल के अगले चरण में प्रवेश करने जा रही है। ऐसे में संभावित विस्तार को संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व तथा राजनीतिक संतुलन के लिहाज से भी देखा जा रहा है। हालांकि इन उद्देश्यों को लेकर अंतिम निर्णय और उसका स्वरूप अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आया है।

मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस के किन विधायकों को मंत्री पद मिल सकता है। कई विधायक लंबे समय से सरकार में प्रतिनिधित्व की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री ने फिलहाल किसी नाम का खुलासा नहीं किया है। इसी तरह यह भी स्पष्ट नहीं है कि डिप्टी स्पीकर पद के लिए किस विधायक के नाम पर विचार चल रहा है। इसलिए राजनीतिक गलियारों में चल रही नामों की चर्चाओं को अभी आधिकारिक फैसला नहीं माना जा सकता।

सोलन में मुख्यमंत्री ने किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर उस समय हिमाचल में भाजपा की सरकार होती तो परियोजना की शर्तों के कारण राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता था। किशाऊ परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री पहले भी कह चुके हैं कि नए समझौते से हिमाचल को आर्थिक लाभ मिलेगा और राज्य पर परियोजना की लागत का अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। वहीं भाजपा ने मुख्यमंत्री के इन दावों पर सवाल उठाते हुए श्वेतपत्र की मांग की है।