Why do people propose on one knee: क्या आपने कभी सोचा है कि लोग एक घुटने पर नीलडाउन होकर प्रपोज़ क्यों करते हैं? आज के जमाने में इस तरह के प्रोपोजल को बेहद रोमांटिक माना जाता है। लड़कियां हमेशा ऐसे ही प्रपोजल की ख्वाहिश रखती हैं।

लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यह रोमांटिक तरीका सगाई की अंगूठियों या वैलेंटाइन डे से शुरू नहीं हुआ था। इतिहासकारों के अनुसार, यह परंपरा सदियों पुराने रीतिरिवाजों के साथ शुरु हुई थी। जिनमें राजपरिवार, धर्म और समर्पण के काम शामिल थे।
मध्य काल में, ‘कोर्टली लव’ की धारणा ने पुरुषों को महिलाओं के प्रति प्रशंसा और समर्पण दिखाने के लिए प्रेरित किया। कला और साहित्य में अकसर प्रेमियों को अपनी प्रेमिका के सामने घुटने टेकते हुए दिखाया जाता था, जिससे घुटने टेकने और रोमांस की शुरुआत हुई।
प्रपोज
कहानी से मिली प्रसिद्धि
इस चलन को एक कहानी के जरिए अधिक प्रसिद्धि मिली। सरगवेन की कहानी में वे एक महिला के सामने घुटनों के बल बैठते हैं। ऐसी कहानियों ने सम्मान, आदर और समर्पण के तौर पर खुद को झुकाने वाले पुरुष की छवि को और मजबूत किया।
घुटने टेकना वफादारी की निशानी थी
बता दें कि मध्यकालीन यूरोप में, किसी लॉर्ड या राजा के प्रति वफादारी दिखाने के लिए घुटनों पर बैठना आम बात थी। बाद में यह शादी के प्रस्तावों से जुड़ गए।
घुटने टेकने का धार्मिक महत्व
कई धार्मिक परंपराओं में घुटने टेकने को लंबे समय से प्रार्थना और श्रद्धा से जोड़ा गया। इससे सगाई की अंगूठी को नाटकीय अंदाज़ में पेश करना आसान हो जाता था। समय के साथ, रिंग बॉक्स लेकर घुटने टेकने वाले व्यक्ति की छवि शादी के प्रस्ताव का एक आम प्रतीक बन गई।
विक्टोरियन युग में सगाई की रस्में
घुटने टेककर प्रपोज करने का रिवाज विक्टोरियन समय में अधिक मशहूर हुआ, तब प्यार को ज्यादा अहमियत दी जाने लगी। मध्य और उच्च वर्गों के बीच शानदार ढंग से प्रपोज करने और निभाने का चलन तेजी से बढ़ गया।
प्रपोज
क्या बताता है घुटनों के बल झुककर प्रपोज करने का तरीका
- सम्मान
- विनम्रता
- कमिटमेंट



