शिमला। हिमाचल प्रदेश में नशे के खिलाफ सरकार का अभियान अब और सख्त होता नजर आ रहा है। चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में फंसे सरकारी कर्मचारियों पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए NDPS एक्ट के मामलों में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ कर दिया है।
जानकारी के अनुसार बिजली बोर्ड प्रबंधन ने ऐसे मामलों में लंबी विभागीय जांच की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब सक्षम प्राधिकारी की अनुमति मिलने के बाद NDPS एक्ट में फंसे कर्मचारियों पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकेगी। इस फैसले के बाद बिजली बोर्ड के उन 12 कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिनके नाम नशे से जुड़े मामलों में सामने आए हैं।
सूत्रों के मुताबिक नए आदेशों के तहत इन कर्मचारियों के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई संभव मानी जा रही है। बोर्ड द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि राज्य सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से 19 फरवरी 2026 को जारी आदेशों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चिट्टा और नशे से जुड़े मामलों में फंसे 91 सरकारी कर्मचारियों की सूची प्रशासनिक सचिवों को सौंपी गई थी। इनमें सबसे अधिक 12 कर्मचारी बिजली बोर्ड से संबंधित बताए गए हैं।
सरकार अब नशे के मामलों में सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई चाहती है, ताकि पूरे प्रशासनिक तंत्र में कड़ा संदेश जाए। बिजली बोर्ड के अंडर सेक्रेटरी (आर एंड ई) की ओर से जारी आदेश सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षण अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों को भेज दिए गए हैं।
सरकार की इस कार्रवाई के बाद बिजली बोर्ड सहित अन्य विभागों में भी हड़कंप का माहौल बताया जा रहा है। वहीं, प्रशासन का कहना है कि नशे के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत आगे भी ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाए जाएंगे।