मुंबई में सड़कों की धुलाई के लिए बीएमसी के 8 करोड़ 25 लाख रुपये के प्रस्ताव पर सियासत गरमा गई है. एक तरफ मुंबई में 10 फीसदी पानी की कटौती लागू है और महाराष्ट्र के कई इलाकों में पानी की कमी और सूखे की स्थिति है, तो दूसरी तरफ बीएमसी 377 सड़कों की करीब 677 किलोमीटर लंबी सड़कें धोने के लिए टैंकर लेने जा रही है. बीएमसी का दावा है कि इसके लिए रिसाइकल किए गए पानी का इस्तेमाल होगा, लेकिन अब AIMIM और स्थायी समिति के अध्यक्ष ने ही इस प्रस्ताव पर सवाल खड़े किए हैं.

बीएमसी की स्थायी समिति के एजेंडे में सड़क धुलाई का प्रस्ताव विषय क्रमांक 9 के तौर पर सामने आया है. इसमें बारिश के मौसम को छोड़कर 150 दिनों के लिए जेटिंग व्यवस्था वाले पानी के टैंकर उपलब्ध कराने की योजना है. बीएमसी के मुताबिक, शहर में बढ़ते धूल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 377 सड़कों की करीब 677 किलोमीटर लंबाई में सफाई और जरूरत के मुताबिक पानी का छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए 2 हजार, 5 हजार और 10 हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों का इस्तेमाल किया जाना है. कुल प्रस्तावित खर्च करीब 8.25 करोड़ रुपये है.

विजय उबाले ने प्रस्ताव का किया विरोध

AIMIM के ग्रुप लीडर विजय उबाले ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए पानी की प्राथमिकता पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि जब मुंबईकरों को ही पानी की कटौती का सामना करना पड़ रहा है, तो सड़कें धोने के लिए पानी की व्यवस्था कैसे की जाएगी. उबाले ने यह भी सवाल उठाया कि बीएमसी के प्रस्ताव में खुद निर्माण और पुनर्विकास के कामों से धूल बढ़ने की बात कही गई है. ऐसे में सड़क धुलाई का खर्च महानगरपालिका क्यों उठाए, इस पर भी उन्होंने सवाल किया है. उनका तर्क है कि विकासकों को एफएसआई और टीडीआर जैसे लाभ दिए जाते हैं, इसलिए निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और गंदगी की सफाई की जिम्मेदारी भी उनसे तय की जानी चाहिए.

स्थायी समिति के अध्यक्ष ने प्रशासन से मांगा जवाब

स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने भी प्रशासन से सड़क धुलाई के लिए पानी की व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा है. शिंदे का कहना है कि इस साल अल नीनो के असर से मुंबई की जलापूर्ति प्रभावित हुई है और हाल की स्थायी समिति की चर्चा में प्रशासन ने भी माना कि पानी का बेहद सावधानी से नियोजन किया जाए, तभी साल निकालना संभव होगा. ऐसे में सड़कें धोने के प्रस्ताव से पहले प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि मुंबईकरों की नियमित जलापूर्ति कैसे सुनिश्चित होगी और सड़क धुलाई के लिए पानी कहां से आएगा.

हालांकि बीएमसी का कहना है कि सड़क धुलाई में पीने के पानी के बजाय रिसाइकल किए गए पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. अब प्रस्ताव पर स्थायी समिति में चर्चा के बाद तय होगा कि इसे मंजूरी मिलती है या इसमें बदलाव किया जाता है.