हिमाचली खबर: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन बड़ों से लेकर बच्चों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। मनोरंजन से ज्यादा इसकी जरूरत ने बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ा दिया है। हालांकि ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों की मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती मातापिता पर होती है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम कैसे किया जाए।

आजकल बच्चे पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक के लिए मोबाइल या डिजिटल उपकरणों का सहारा लेते हैं। खासकर खाना खाते वक्त भी उनके हाथ में मोबाइल रहता है। इसकी वजह से वे जिद्दी और चिड़चिड़े होने लगते हैं। यह समस्या हर मातापिता के लिए बहुत बड़ी हो जाती है। ऐसे में बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना बहुत जरूरी हो जाता है। इसके लिए कुछ प्रभावी तरीकों को अपनाया जा सकता है जो मोबाइल की लत को दूर रखने में मदद कर सकते हैं।
स्क्रीन टाइम सीमित करें
बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करना चाहते हैं तो उनके मोबाइल देखने के समय को सीमित किया जा सकता है। पढ़ाई, मनोरंजन या रिसर्च के लिए मोबाइल का उपयोग सिर्फ सीमित समय के लिए ही किया जाना चाहिए। इससे हर दिन उन्हें कुछ घंटों के लिए मोबाइल इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।
फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाएं
बच्चों को बाहर खेलने और अन्य फिजिकल एक्टिविटी करने के लिए भेजें। स्कूल के बाद शाम के समय उनको पार्क या बच्चों के साथ खेलने का समय दें। जिससे उनके स्क्रीन टाइम में कमी आएगी और वह शारीरिक रूप से भी एक्टिव रहेंगे। इसके अलावा बच्चों को स्विमिंग, डांस क्लास, गेम्स आदि जॉइन करवा सकते हैं।
क्रिएटिविटी पर ध्यान दें
अगर आपका बच्चा क्रिएटिव चीजों में दिलचस्पी दिखाता है तो उसकी इस कला को बढ़ावा देना चाहिए। बच्चों को किताबें पढ़ने का शौक है तो उन्हें लाइब्रेरी जॉइन करवा सकते हैं। म्यूजिक, आर्ट और क्राफ्ट से जुड़ी चीजों में उसकी दिलचस्पी है तो इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करें। इससे नई चीजें जानने में उसकी रुचि बढ़ेगी।
परिवार के साथ समय
गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को किसी जगह घूमने ले जा सकते हैं। इससे बच्चा परिवार के साथ ज्यादा समय बिताएंगे और मोबाइल के बिना भी खुश रहना सीखेगा। उनके साथ बातचीत करके उन्हें आप खास महसूस करा सकते हैं। इसके अलावा वीकेंड पर पिकनिक का प्लान कर सकते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल
अगर बच्चा मोबाइल देख रहा है तो इस बात का ख्याल रखें कि वह सिर्फ एजुकेशनल और सकारात्मक कंटेंट ही देखे। इसके लिए आप मोबाइल में पैरेंटल कंट्रोल फीचर का उपयोग कर सकते हैं। खुद भी मातापिता होने के रूप में मोबाइल का उपयोग सीमित करें। क्योंकि बच्चा अक्सर बडों के व्यवहार से ही सीखता है।



