हिमाचल: मस्जिद से उठी आवाज… विजय के इलाज को मुस्लिम समाज ने 15 मिनट में जुटाए  31 हजार रुपये

दोनों किडनियां खराब होने से जिंदगी की जंग लड़ रहे हिंदू युवक के लिए आगे आया मुस्लिम समाज

नाहन। जब बात किसी बेबस की जिंदगी बचाने की हो, तो मजहब की दीवारें अपने आप ढह जाती हैं। सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की ऐसी ही एक खूबसूरत नजीर हिमाचल प्रदेश के  सिरमौर जिले के नाहन शहर में देखने को मिली है। यहां दोनों किडनियां खराब होने से जिंदगी की जंग लड़ रहे एक हिंदू युवक के इलाज के लिए मुस्लिम समाज के भाइयों ने दरियादिली दिखाते हुए मदद के हाथ बढ़ाए हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने महज 10 से 15 मिनट में 31 हजार रुपये की सहयोग राशि जुटा दी।

शुक्रवार को कच्चा टैंक स्थित अंजुमन इस्लामिया जामा मस्जिद से विजय कुमार के इलाज के लिए आर्थिक सहयोग की अपील की गई। अंजुमन इस्लामिया के अध्यक्ष बॉबी अहमद ने लोगों से जरूरतमंद परिवार की सहायता करने का आग्रह किया। अपील का असर ऐसा हुआ कि मुस्लिम समाज के लोगों ने कुछ ही मिनटों में 31 हजार रुपये एकत्र कर दिए।

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मदद की यह पहल यहीं नहीं रुकी। नाहन शहर की अन्य पांच मस्जिदों में भी प्रत्येक शुक्रवार को विजय के इलाज के लिए सहयोग राशि जुटाने की बात कही गई है। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार के लिए यह सहयोग उस समय उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर सामने आया है, जब विजय लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।

हरिपुर खोल निवासी विजय कुमार की दोनों किडनियां लंबे समय से खराब हैं और उनका उपचार पीजीआई में चल रहा है। बीमारी के कारण वह मोटर मैकेनिक का अपना काम भी नहीं कर पा रहे हैं। यही काम पहले उनके परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा था। बीमारी बढ़ने के बाद इलाज का खर्च परिवार के लिए लगातार चुनौती बन गया है।

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विजय के परिवार में मातापिता, पत्नी और छोटा भाई हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और मातापिता की आय का भी कोई स्थायी साधन नहीं है। ऐसे में परिवार के सामने इलाज का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। वहीं विजय की सात साल की बेटी की सबसे बड़ी इच्छा है कि उसके पिता जल्द स्वस्थ होकर घर वापस आएं।

विजय के इलाज के लिए पिछले करीब एक सप्ताह से नाहन में आर्थिक सहयोग जुटाने का अभियान चलाया जा रहा है। दिव्यांश बैरागी, राहुल और उनके साथी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक विजय की कहानी पहुंचाकर सहायता की अपील कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के जरिए भी लोगों से परिवार की मदद करने का आग्रह किया जा रहा है।

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विजय की मदद के लिए नाहन के चौगान मैदान में चल रहे मेले के दौरान भी सहायता जुटाने के लिए स्टॉल लगाया गया है। स्थानीय लोगों से अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करने की अपील की जा रही है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि छोटीछोटी मदद मिलकर विजय के इलाज के लिए बड़ी राहत बन सकती है।

विजय के इलाज के लिए मुस्लिम समाज की ओर से किया गया सहयोग सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश दे रहा है। एक हिंदू परिवार के संकट में मुस्लिम समुदाय का आगे आना बताता है कि मुश्किल समय में इंसानियत की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती। नाहन में सामने आया यह उदाहरण उस सोच को मजबूती देता है कि मंदिर हो या मस्जिद, धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन दर्द और इंसानियत की भाषा एक होती है। जरूरत के समय एकदूसरे के साथ खड़ा होना ही समाज की असली ताकत है।

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दिव्यांश बैरागी ने मुस्लिम समाज के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि जरूरतमंद की सहायता के लिए जिस तरह लोग धर्म से ऊपर उठकर सामने आए, वह समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनके मुताबिक विजय के इलाज के लिए हर वर्ग से मिल रहा सहयोग परिवार के लिए उम्मीद बढ़ाने वाला है।

विजय के इलाज के लिए चल रही मुहिम अब सिर्फ आर्थिक सहयोग जुटाने का अभियान नहीं रह गई है। यह नाहन में सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल बनती जा रही है। एक तरफ परिवार अपने बेटे, पति और पिता को स्वस्थ देखने की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर शहर के लोग अपनेअपने स्तर पर मदद के लिए आगे आ रहे हैं। विजय की सात साल की बेटी की अपने पिता को फिर से स्वस्थ देखने की उम्मीद अब नाहन के लोगों की सामूहिक संवेदना से जुड़ गई है।