Farmer Success Story: आंध्र प्रदेश का अनंतपुर जिला कभी अपनी शुष्क मिट्टी और पानी की कमी के लिए जाना जाता था, लेकिन आधुनिक कृषि पद्धतियों और नई विधियों, विचारों के कारण, यह जिला विशेष रूप से अनार और अंगूर की खेती के लिए स्वर्ग बन गया है. इस परिवर्तन का प्रमाण राप्तडू मंडल के रामनेपल्ली गांव के किसान किष्टा रेड्डी हैं.

वे अपने 15 एकड़ के अनार के बाग से प्रति वर्ष 1 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित करते हैं और अन्य किसानों को प्रेरित करते हैं. अनार की खेती में प्रबंधन किष्टा रेड्डी की सफलता की कुंजी है. उन्होंने समय पर सिंचाई और जैविक खाद देकर पौधों को स्वस्थ रूप से उगाया है. उन्होंने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम किया है.

आधुनिक तरीकों को अपनाया

गोबर, यूरिया कॉम्प्लेक्स और चावल के आटे का उपयोग करके मिट्टी को संरक्षित किया है. किष्टा रेड्डी ने बताया कि कटाई के बाद, ठूंठ हटा दिए जाते हैं. शेष कटाई की जाती है और जैविक खाद डालकर खेत को फिर से तैयार किया जाता है. उन्होंने बताया कि अनार मकर संक्रांति तक कटाई के लिए तैयार हो जाएंगे. किष्टा रेड्डी ने जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक तरीकों को अपनाया है.

तेज धूप और पाले से अनार के पौधों को बचाने के लिए उन्होंने अपने 15 एकड़ के बाग में एक जालीदार कवरलगाया है. इस जालीदार कवर से पौधों को कीटों से सुरक्षा मिली है और फलों की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है. परिणामस्वरूप, उन्हें प्रति वर्ष 100 से 130 टन अनार की पैदावार प्राप्त हो रही है. उनके बाग में पकने वाले अनार लाल रंग के और उच्च गुणवत्ता वाले होते हैं.

अनार की हमेशा बाजार में अच्छी कीमत मिलती है

किष्टा रेड्डी अनार की हमेशा बाजार में अच्छी कीमत पाते हैं. खास बात यह है कि व्यापारी सीधे उनसे बाग से खरीददारी करने आते हैं, इसलिए मुनाफा सीधे किसान किष्टा रेड्डी को मिलता है, बिचौलियों का कोई दखल नहीं होता. अनार की खेती के अलावा, किष्टा रेड्डी के पास 8 एकड़ का अंगूर का बाग भी है. अंगूर से भी उनको अच्छी आय़ होती है.