घरेलू शेयर बाजार में बीते सप्ताह आई तेजी का फायदा देश की सबसे बड़ी कंपनियों को भी मिला. सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पांच के बाजार पूंजीकरण में कुल 1.54 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सबसे बड़ी लाभार्थी रही, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और बजाज फाइनेंस के मार्केट कैप में भी अच्छा इजाफा हुआ.

बीते सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 582.06 अंक यानी 0.75% और एनएसई निफ्टी 127.40 अंक यानी 0.52% की बढ़त के साथ बंद हुए. बाजार में सकारात्मक निवेशक धारणा का सीधा असर बड़ी कंपनियों के मूल्यांकन पर देखने को मिला.

TCS ने सबसे ज्यादा जोड़ी बाजार वैल्यू

सप्ताह के दौरान TCS का बाजार पूंजीकरण सबसे अधिक 72,072.30 करोड़ रुपये बढ़कर 8.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया. कंपनी ने हाल ही में जून तिमाही के नतीजे जारी किए थे, जिसमें उसका शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 4.61% बढ़ा. ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। बेहतर तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने कंपनी के शेयरों में जमकर खरीदारी की.

वहीं, आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप करीब 29,062 करोड़ रुपये बढ़कर 10.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. रिलायंस इंडस्ट्रीज की बाजार वैल्यू में 23,885 करोड़ रुपये, बजाज फाइनेंस में करीब 21,947 करोड़ रुपये और एसबीआई में 7,338 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

इन कंपनियों के मार्केट कैप में आई गिरावट

दूसरी ओर, सभी बड़ी कंपनियों के लिए बीता सप्ताह सकारात्मक नहीं रहा. लार्सन एंड टुब्रो के बाजार पूंजीकरण में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई. कंपनी का मार्केट कैप करीब 18,098 करोड़ रुपये घट गया. इसके अलावा एलआईसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्यांकन में भी कमी आई.

एलआईसी का मार्केट कैप 12,081 करोड़ रुपये, भारती एयरटेल का 7,706 करोड़ रुपये, एचडीएफसी बैंक का 7,085 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान यूनिलीवर का 1,222 करोड़ रुपये घट गया. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।

रिलायंस बनी रही देश की सबसे मूल्यवान कंपनी

बाजार पूंजीकरण के आधार पर रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है. इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक रहे और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रही, तो बड़ी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.