कैबिनेट जल्द ही कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंज़ूरी दे सकती है. इस योजना का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है. सूत्रों के अनुसार, कोयला मंत्रालय ने कोल गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने वाली इस योजना के लिए कैबिनेट नोट पहले ही तैयार कर लिया है, जिसका वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपए है. इस प्रस्तावित योजना का उद्देश्य पूरे देश में सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को गति देना है.

इसके साथ ही, इसका टारगेट LNG, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट, अमोनिया, DRI के ज़रिए कोकिंग कोयला, मेथनॉल और DME जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं के आयात पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है. यह योजना फ्यूल और कैमिकल के प्रोडक्शन के लिए घरेलू कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के बेहतर उपयोग को सक्षम बनाती है, और 2030 तक 100 मिलियन टन कोल गैसीफिकेशन क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करती है.
कोल गैसीफिकेशन पर सरकार का जोर
उन्होंने बताया कि यह एक इंटीग्रेटिड स्कीम है जिसमें कोई कैटेगिरी डिविजन नहीं है, और किसी एक प्रोजेक्ट्स के लिए अधिकतम वित्तीय सहायता 3,000 करोड़ रुपए है. सूत्रों ने बताया कि गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स के लिए पिछली वित्तीय प्रोत्साहन योजना में, सरकार ने तीन श्रेणियों के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की थी. इसमें निजी क्षेत्र के लिए प्रति परियोजना अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए प्रति परियोजना 1,350 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन शामिल था. एक उद्योग विश्लेषक के अनुसार, कोल गैसीफिकेशन के लिए सरकार का यह नया जोर हाल ही में पश्चिम एशिया में उपजे तनाव के बाद आया है. इस तनाव ने LNG, LPG और अन्य हाइड्रोकार्बन की आपूर्ति में व्यवधान के प्रति देश की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है, जिससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल मिला है.
कोयले का विशाल भंडार
सरकार अब कोल गैसीफिकेशन को एक रणनीतिक माध्यम के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जिसका उपयोग घरेलू कोयले को फ्यूल और कैमिकल्स में बदलने, इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए किया जाएगा—विशेषकर ऐसे समय में जब ग्लोबल सप्लाई चेन अभी भी नाजुक बनी हुई हैं. भारत के पास 401 अरब टन का विशाल कोयला भंडार है, जो इसे घरेलू संसाधनों का लाभ उठाकर आयात पर निर्भरता कम करने और एक स्वच्छ, सुदृढ़ ऊर्जा इकोनॉमी के निर्माण के लिए एक अद्वितीय स्थिति में रखता है.
कोयला बना इकोनॉमी रीढ़
कोयला भारत के एनर्जी सेक्टर की रीढ़ बना हुआ है, जो देश के कुल ऊर्जा मिश्रण में 55 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है. ग्लोबल लेवल पर कोयले के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और कंज्यूमर के रूप में, भारत की ऊर्जा मांगों में लगातार वृद्धि के साथसाथ उसके कोयला उपभोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है. गैसीफिकेशन भारत के लिए एक अनोखा अवसर प्रस्तुत करता है, जिसके माध्यम से वह कोयले को ‘सिन्गैस’ में बदलकर, क्लीन और कुशल उपयोग के तरीकों से अपने विशाल घरेलू भंडारों का पूरा लाभ उठा सकता है. यह प्रोसेस सिन्गैस या उससे बनने वाले अन्य प्रोडक्ट्सजैसे रसायन, पेट्रोकेमिकल्स, उर्वरक, बिजली और DRIके घरेलू उत्पादन को संभव बनाती है.



