एशियन गेम्स: भावना ठाकुर के परिवार ने खेत में मोबाइल पर देखा मैच, जीतते ही नाचने लगे पिता

लहसुन की बिजाई करते देखा मैच, खेत में ही मनाया जीत का जश्न

मंडी। जापान में एशियन गेम्स के फाइनल में जब भारतीय महिला कबड्डी टीम की खिलाड़ी ईरान के खिलाफ स्वर्ण पदक के लिए मैदान में अपना पूरा दम लगा रही थीं, उसी वक्त हिमाचल के मंडी जिले के एक छोटे से गांव में एक परिवार खेतों में पसीना बहाते हुए अपनी बेटी के लिए दुआ कर रहा था। एक तरफ कोर्ट पर भावना ठाकुर समेत हिमाचल की चार बेटियां देश के लिए स्वर्ण जीतने की जंग लड़ रही थीं, तो दूसरी तरफ गोहर के बैला गांव में भावना के मातापिता और परिवार के सदस्य लहसुन की बिजाई में जुटे थे।

हाथ खेत में काम कर रहे थे, लेकिन नजर मोबाइल फोन की स्क्रीन पर टिकी थी। हर रेड, हर अंक और हर पल की खबर परिवार मोबाइल पर लाइव मुकाबला देखकर ले रहा था। जैसे ही भारतीय टीम ने ईरान को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक अपने नाम किया, खेत में काम कर रहे भावना के परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। पिता प्रेम सिंह खुशी से झूम उठे और परिवार के सदस्यों ने खेत में ही एकदूसरे को गले लगाकर जीत का जश्न मनाया।

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भावना ठाकुर के परिवार के लिए शनिवार का दिन किसी त्योहार से कम नहीं था। सुबह परिवार के सभी सदस्य खेतों में लहसुन की बिजाई करने पहुंच गए थे। पहाड़ी गांवों की तरह रोजमर्रा का काम जारी था, लेकिन इस दिन खेत में काम करने वालों की निगाहें बारबार मोबाइल की तरफ उठ रही थीं। कारण था उनकी अपनी बेटी भावना का एशियन गेम्स का फाइनल मुकाबला।

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भारतीय महिला कबड्डी टीम में हिमाचल की पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर शामिल थीं। चारों ने टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टीम के स्वर्ण पदक अभियान का हिस्सा बनीं।

मैच जैसेजैसे निर्णायक दौर में पहुंचा, भावना के परिवार की धड़कनें भी बढ़ती गईं। खेत में लहसुन की बिजाई का काम चल रहा था और साथ ही मोबाइल पर फाइनल मुकाबला देखा जा रहा था। फिर आया वह पल जिसका परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था। भारत ने ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया।

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टीम इंडिया की जीत की खबर मिलते ही खेत में खुशी का माहौल बन गया। भावना के पिता प्रेम सिंह अपनी खुशी रोक नहीं पाए और वहीं खेत में झूम उठे। परिवार के दूसरे सदस्यों ने भी एकदूसरे को बधाई दी। जिस खेत में कुछ देर पहले परिवार मेहनत कर रहा था, वही खेत देखते ही देखते भावना की गोल्डन जीत के जश्न का मैदान बन गया।

भावना ठाकुर के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह एक साधारण किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। गोहर उपमंडल के बैला गांव की रहने वाली 27 वर्षीय भावना के पिता प्रेम सिंह किसान हैं, जबकि उनकी माता दासी देवी गृहिणी हैं।

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भावना चार भाईबहनों में सबसे छोटी हैं। उनकी बड़ी बहन कांता देवी, बहन पुष्पा और भाई दुनी चंद हैं। परिवार ने भावना के खेल करियर में हमेशा उनका साथ दिया और आज उसी मेहनत का नतीजा एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया है। भावना की भाभी प्रोमिला देवी ने कहा कि उनकी उपलब्धि पर पूरा परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र गौरवान्वित है।

भावना की बड़ी बहन कांता देवी ने कहा कि यह पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है। उनकी बहन ने एक बार फिर अपने गांव, गोहर, मंडी, हिमाचल और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि परिवार की यही कामना है कि भावना इसी तरह आगे बढ़ती रहें और खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल करती रहें।

भारतीय महिला कबड्डी टीम की इस स्वर्णिम जीत में हिमाचल की चार बेटियों की मौजूदगी ने प्रदेश के गौरव को और बढ़ा दिया। पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर भारतीय टीम का हिस्सा रहीं। टीम की कप्तानी भी हिमाचल की पुष्पा राणा के हाथों में रही। एशियन गेम्स में उतरने से पहले ही इन चारों खिलाड़ियों के चयन को हिमाचल के लिए बड़ी उपलब्धि माना गया था। अब स्वर्ण पदक जीतकर इन खिलाड़ियों ने अपनी इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की शानदार जीत पर खिलाड़ियों को बधाई दी है। उन्होंने टीम में शामिल हिमाचल की चारों बेटियों की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश लौटने पर पदक विजेताओं का स्वागत किया जाएगा। सरकार की ओर से नियमों के तहत खिलाड़ियों को इनामी राशि देने की बात भी कही गई है। मुख्यमंत्री ने मंडी जिले के जोगिंद्रनगर से संबंध रखने वाले धावक सावन बरवाल को भी उनकी उपलब्धि पर बधाई दी।