ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाऊं गांव के पैरा एथलीट निषाद कुमार ने पैरा एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन कर इतिहास रच दिया है। मंगलवार को दशहरे के दिन निषाद ने ऊंची कूद में 2.04 मीटर की छलांग लगाकर देश के लिए स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने अपनी मां से किए दो गोल्ड मेडल जीतने के वादे को भी पूरा कर दिया।

 

इससे एक दिन पहले सोमवार को निषाद ने पहली बार लंबी कूद में हिस्सा लिया था और 7.11 मीटर की छलांग लगाकर वहां भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इस तरह एक ही पैरा एशियाई खेलों में लंबी कूद और ऊंची कूद दोनों में स्वर्ण जीतकर उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

ऊंची कूद में शुरुआत से ही बनाए रखी बढ़त

निषाद ने ऊंची कूद की टी-47 स्पर्धा में शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 1.88 मीटर, 1.94 मीटर, 1.98 मीटर और 2.02 मीटर की ऊंचाई को पहले ही प्रयास में पार कर लिया। इसके बाद उन्होंने 2.04 मीटर की ऊंचाई भी पार कर स्वर्ण पदक पक्का कर लिया।

 

 

गोल्ड मेडल अपने नाम करने के बाद निषाद ने 2.06 मीटर की ऊंचाई पार करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने देश के लिए एक और स्वर्ण पदक जीत लिया।

लंबी और ऊंची कूद दोनों में गोल्ड जीतना बड़ी उपलब्धि

पैरा एथलेटिक्स में लंबी कूद और ऊंची कूद दोनों अलग-अलग तरह की स्पर्धाएं हैं। दोनों में अलग तकनीक, गति और शरीर के संतुलन की जरूरत होती है। ऐसे में एक ही प्रतियोगिता में दोनों स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में बड़ी और दुर्लभ उपलब्धि है।

 

पहली बार लंबी कूद में उतरे और जीत लिया गोल्ड

सोमवार को आइची नागोया में पुरुषों की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में निषाद ने 7.11 मीटर की छलांग लगाई और पहला स्थान हासिल किया। खास बात यह है कि 27 वर्षीय निषाद पहली बार लंबी कूद में उतरे थे और अपने पहले ही मुकाबले में गोल्ड मेडल जीत लिया। ऊंची कूद में पहले से अपनी पहचान बना चुके निषाद इस समय लंबी कूद में विश्व रैंकिंग में भी शीर्ष स्थान पर हैं।

माता-पिता ने बेटे के सपने के लिए की खूब मेहनत

निषाद की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता की मेहनत भी बड़ी वजह रही है। उनके पिता रछपाल सिंह किसान हैं। बेटे के खेल और उसकी खुराक में कोई कमी न रहे, इसके लिए उन्होंने अतिरिक्त मेहनत कर सब्जियां उगाईं।

 

 

वहीं उनकी मां पुष्पा देवी ने मवेशी पालकर दूध बेचा और बेटे के खेल के सपने को पूरा करने में उसका साथ दिया। माता-पिता की मेहनत और निषाद की कड़ी मेहनत का नतीजा आज पूरी दुनिया देख रही है।

2,500 रुपये लेकर प्रशिक्षण के लिए पंचकूला पहुंचे थे निषाद

निषाद की जिंदगी संघर्ष और हिम्मत की मिसाल है। बचपन में एक हादसे में उनका हाथ कट गया था। इस घटना ने परिवार को काफी झकझोर दिया, लेकिन निषाद ने अपनी शारीरिक परेशानी को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

 

 

स्कूल के समय से ही उन्होंने खेलों में अपनी प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करते हुए उन्होंने ऊंची कूद में राज्य स्तर पर पहला स्थान भी हासिल किया। बेहतर प्रशिक्षण लेने के लिए वर्ष 2017 में निषाद महज 2,500 रुपये लेकर पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचे थे। वहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा और मेहनत को पहचाना।

2019 में मिली राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेनिंग

वर्ष 2019 में निषाद को बंगलूरू के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में अभ्यास करने का मौका मिला। इसी साल दुबई में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

 

 

इसके बाद वर्ष 2021 में उन्होंने दुबई में एशियाई रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भी रजत पदक अपने नाम किए। खेलों में उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

मां बोलीं- बेटे ने दो गोल्ड लाने का वादा पूरा कर दिया

निषाद के दो गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। बेटे की इस कामयाबी से उनकी मां पुष्पा देवी बेहद खुश और भावुक हैं। पुष्पा देवी ने बताया कि सोमवार को जब निषाद ने लंबी कूद में पहला गोल्ड जीता था, तभी पूरा परिवार बहुत खुश था। मंगलवार को ऊंची कूद में दूसरा गोल्ड जीतकर उसने परिवार की खुशी दोगुनी कर दी। उन्होंने बताया कि जब निषाद जापान जाने की तैयारी कर रहा था, तब उसने कहा था कि वह दो स्पर्धाओं की तैयारी कर रहा है। मां ने उसे समझाया था कि एक ही खेल काफी है, दो स्पर्धाओं के लिए इतनी मेहनत करने की जरूरत नहीं है।

 

 

इस पर निषाद ने मां से कहा था कि वह चिंता न करें और इस बार एशियाई खेलों से दो गोल्ड मेडल लेकर ही वापस आएगा। मंगलवार को दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर उसने अपनी मां से किया वादा पूरा कर दिया।

घर लौटने पर बेटे के लिए बनेगी पसंदीदा खीर

निषाद के घर लौटने पर उनके स्वागत की भी तैयारी शुरू हो गई है। मां पुष्पा देवी ने बताया कि गांव लौटने पर बेटे का जोरदार स्वागत किया जाएगा। घर आने पर उसके लिए उसकी पसंदीदा खीर बनाई जाएगी, क्योंकि निषाद को खीर बहुत पसंद है।

 

 

निषाद की शादी को लेकर पूछे जाने पर उनकी मां ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर आज ही कोई अच्छी लड़की मिल जाए तो वह कल ही बेटे की शादी कर देंगी। निषाद की लंबाई 6 फीट 4 इंच है, इसलिए परिवार उसके कद के हिसाब से लड़की की तलाश कर रहा है। अच्छी लड़की मिलते ही शादी कर दी जाएगी।

टीवी पर मुकाबला देख रहा था पूरा परिवार

मंगलवार को शाम 4 बजकर 10 मिनट पर निषाद की प्रतियोगिता शुरू हुई। इसे देखने के लिए उनके पिता रछपाल सिंह, मां पुष्पा देवी और बहन रमा देवी सुबह से ही टीवी के सामने बैठे थे।

 

 

मुकाबले के दौरान परिवार की नजरें लगातार टीवी स्क्रीन पर टिकी रहीं। जैसे ही निषाद ने 2.04 मीटर की स्वर्णिम छलांग लगाई, पूरा परिवार खुशी से झूम उठा।

जीत के बाद घर में मना जश्न, बधाई देने वालों का लगा तांता

निषाद की जीत के बाद देर शाम परिवार के लोगों ने पटाखे चलाकर खुशी मनाई। मां पुष्पा देवी ने भावुक होकर कहा कि उनके बेटे ने प्रतियोगिता से पहले किया अपना वादा पूरा कर दिया और दशहरे के दिन उन्हें और पूरे देश को शानदार तोहफा दिया।

 

 

निषाद की इस ऐतिहासिक जीत के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। फोन पर भी लगातार शुभकामनाएं आने लगीं। शाम को ग्राम पंचायत के उपप्रधान चमनलाल, नरेश कुमार और सुमन लता समेत कई लोग उनके घर पहुंचे और परिवार को बधाई दी।

 

 

उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव, पंचायत, हिमाचल प्रदेश और देश के लिए गर्व का दिन है। गांव के बेटे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।