गौरतलब है कि शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदेश से जुड़े विभिन्न राजनीतिक, प्रशासनिक और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होती है। ऐसे में सत्र के समय में संभावित बदलाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी नजर बनी हुई है।