हिमाचल पहुंची केंद्रीय टीम, आपदा में हुए नुकसान का लिया जायजा; प्रभावित क्षेत्रों को नजदीक से देखा

इस मानसून हिमाचल को हुआ है 3500 करोड़ से अधिक का नुकसान
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जमकर तबाही मचाई। प्रदेश के कई हिस्सों में सड़कें क्षतिग्रस्त हुईं, पुल और पेयजल योजनाएं प्रभावित हुईं, खेतोंबागीचों को नुकसान पहुंचा और कई क्षेत्रों में सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। मानसून की इस मार से हिमाचल को 3500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का आकलन सामने आया है। अब इसी नुकसान की जमीनी हकीकत परखने के लिए केंद्र सरकार की अंतरमंत्रालय केंद्रीय टीम हिमाचल पहुंच गई है।
छह सदस्यीय केंद्रीय टीम ने सोमवार को कांगड़ा जिले में पहुंचकर आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण शुरू किया। टीम ने पहले दिन शाहपुर क्षेत्र में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान को मौके पर जाकर देखा और संबंधित अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। केंद्रीय टीम के दौरे को राज्य के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि निरीक्षण के आधार पर आपदा से हुए नुकसान और राहतपुनर्वास की स्थिति का आकलन किया जाएगा।
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केंद्रीय टीम का नेतृत्व गृह मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एम. रामचंद्रुडु कर रहे हैं। टीम में जलशक्ति मंत्रालय के निदेशक प्रकाश चंद, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक डॉ. सुभाष चंद्र, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निदेशक रामवतार मीणा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के कार्यकारी अभियंता शाश्वत महापात्रा, वित्त मंत्रालय के उप निदेशक कनव दुआ और इसरो के वैज्ञानिक डॉ. शशिवर्धन रेड्डी शामिल हैं। अलगअलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के शामिल होने से टीम सड़क, कृषि, पेयजल, ग्रामीण विकास और अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की स्थिति को अलगअलग पहलुओं से देखेगी।
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कांगड़ा पहुंचने के बाद केंद्रीय टीम ने शाहपुर क्षेत्र का दौरा किया। यहां टीम ने आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में जाकर नुकसान का जायजा लिया। अधिकारियों ने टीम को बताया कि भारी बारिश और उससे पैदा हुई परिस्थितियों के कारण जिले के विभिन्न हिस्सों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। स्थलीय निरीक्षण के दौरान केंद्रीय टीम ने प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा, ताकि कागजी आकलन और मौके पर हुए नुकसान के बीच स्थिति को समझा जा सके।
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केंद्रीय टीम के निरीक्षण का दायरा केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगा। टीम विभिन्न विभागों की ओर से दर्ज किए गए नुकसान की भी समीक्षा करेगी। इसमें सड़कें, पेयजल व्यवस्था, कृषि, ग्रामीण विकास समेत अन्य क्षेत्रों को हुए नुकसान को शामिल किया गया है। टीम संबंधित विभागों से प्राप्त नुकसान के आंकड़ों और मौके पर दिखाई दे रही स्थिति का भी जायजा लेगी।
कांगड़ा में अधिकारियों के साथ बैठक और शाहपुर में निरीक्षण के बाद केंद्रीय टीम चंबा जिले के भटियात क्षेत्र के लिए रवाना हुई। यहां भी आपदा प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। बारिश और भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों में टीम सड़क, पेयजल, कृषि तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी परिसंपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करेगी। इसके साथ ही आपदा के बाद चल रहे राहत एवं पुनर्वास कार्यों की प्रगति भी जानी जाएगी।
नुकसान का आकलन करने के साथ केंद्रीय टीम यह भी देख रही है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। जिला प्रशासन ने टीम को अब तक किए गए राहत कार्यों और प्रभावित क्षेत्रों में बहाली की स्थिति की जानकारी दी। आपदा के बाद सड़क संपर्क बहाल करने, पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने और अन्य आवश्यक सेवाओं को सामान्य करने के लिए किए गए कार्यों की भी जानकारी केंद्रीय अधिकारियों को दी जा रही है।
छह सदस्यीय टीम का कांगड़ा दौरा दो दिनों का है। इस दौरान टीम जिले के विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी और संबंधित विभागों से नुकसान का विस्तृत ब्यौरा लेगी। मौके पर स्थिति देखने के साथ अधिकारियों के साथ बैठकें भी की जाएंगी। कुल मिलाकर, मानसून की तबाही के बाद अब केंद्र की टीम हिमाचल के जख्मों की जमीनी तस्वीर देखने पहुंची है। कांगड़ा से शुरू हुई यह पड़ताल प्रभावित इलाकों में हुए वास्तविक नुकसान, राहत कार्यों और पुनर्वास की स्थिति को समझने की दिशा में अहम कदम है। अब इस निरीक्षण के बाद केंद्र और राज्य स्तर पर राहत एवं पुनर्वास को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।



