हरियाणा में गन्ना किसानों ने बढ़ती लागत के बीच गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग की; आंदोलन की चेतावनी

रोहतक : पिछले कुछ सप्ताह में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद हरियाणा के गन्ना किसानों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं। किसानों का कहना है कि, खेती की बढ़ती लागत से उनकी आय प्रभावित हो रही है और गन्ने की खेती पहले की तुलना में कम लाभकारी होती जा रही है। किसान संगठनों ने गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग की है। किसान संगठनों का कहना है कि, बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने के बावजूद किसान खाद, मजदूरी, सिंचाई, डीजल और अन्य कृषि लागतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का बोझ उठा रहे हैं।

अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य महासचिव सुमित दलाल ने कहा, “किसानों से गन्ना 4.15 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है, जबकि बाजार में चीनी करीब 60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। गन्ने से एथेनॉल बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन बढ़ती लागत के बीच गन्ना किसानों की आय घट रही है।

दलाल ने स्वामीनाथन आयोग की C2+50 प्रतिशत की सिफारिश का हवाला देते हुए गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि, उत्पादन लागत बढ़ने और अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण राज्य में गन्ने की खेती का रकबा घट रहा है। किसानों के लिए गन्ने की खेती को टिकाऊ बनाए रखने के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।

गोहाना में हुई किसानों की बैठक
19 सितंबर को सोनीपत के गोहाना में गन्ना किसानों की राज्य स्तरीय बैठक हुई। इसमें किसानों ने अपनी मांगों पर चर्चा की और आगामी आंदोलन की रणनीति तैयार की। किसान इस मुद्दे को लेकर सहकारिता मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सरकार से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। किसानों ने चेतावनी दी है कि गन्ने का दाम बढ़ाने की मांग पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।

गन्ने के दाम में बढ़ोतरी के अलावा किसानों ने फसल सुरक्षा के लिए चीनी मिलों की ओर से उन्नत ड्रोन उपलब्ध कराने, जलभराव और बीमारियों से फसल को हुए नुकसान का मुआवजा देने, उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि देने तथा गन्ना कटाई के लिए मशीनरी उपलब्ध कराने की मांग की है।

दलाल ने कहा कि, किसानों को गन्ना आपूर्ति में देरी और उचित कीमत नहीं मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने व्यापक और किसान हितैषी नीति की जरूरत बताई। साथ ही उन्होंने कहा कि पहले की तरह गन्ना किसानों को चीनी भी नियंत्रित दरों पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

बढ़ती लागत से किसानों पर आर्थिक दबाव
गन्ना किसानों ने खेती की लागत में तेज बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। किसान सुनील ने कहा कि, मजदूरी में बढ़ोतरी और फसल में बीमारी के कारण होने वाले नुकसान के जोखिम ने किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा, गन्ना किसान संकट का सामना कर रहे हैं और अब इस स्थिति से उबरने के लिए राज्य सरकार से आर्थिक सहायता की उम्मीद कर रहे हैं।

गांव-गांव अभियान चलाने का फैसला
इस बीच, अखिल भारतीय किसान सभा की हरियाणा राज्य समिति की रोहतक में हुई हालिया बैठक में किसानों की मांगों को लेकर गांव-गांव अभियान चलाने और विधायकों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। इनमें गन्ने का दाम बढ़ाने, व्यापार समझौते को रद्द करने और बिजली वितरण में निजी लाइसेंस का विरोध करने जैसी मांगें शामिल हैं। समिति ने 2 अक्टूबर से गांवों में पंचायतें आयोजित करने का भी निर्णय लिया है।