हिमाचल : करोड़ों खर्च कर बनाया था हॉस्टल, 4 महीने में ही दरका अधिकारियों पर गिरेगी गाज

ठेकेदार को दो साल के लिए सरकारी विभागों में ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करने वाले ठियोग कॉलेज छात्रावास मामले में विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने सख्त रुख अपनाया है। करीब 2.71 करोड़ रुपये की लागत से तैयार छात्रावास भवन हस्तांतरण के महज चार महीने बाद ही दरकने और एक तरफ झुकने लगा था।
तकनीकी जांच में भवन के कॉलम, बीम और स्लैब समेत कई महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल हिस्से असुरक्षित पाए गए। अब पुराने भवन की मरम्मत कर उसे इस्तेमाल करने के बजाय हिमुडा को अपने खर्चे पर 104 विद्यार्थियों के लिए नया छात्रावास बनाना होगा।
बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना के तहत अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए इस भवन का निर्माण किया गया था। भवन का काम वर्ष 2018 में पूरा हुआ और 22 नवंबर 2018 को इसे ठियोग कॉलेज को सौंप दिया गया। हालांकि, अप्रैल 2019 में ही भवन में गंभीर दरारें दिखाई देने लगीं। इसके बाद भवन के एक तरफ झुकने की समस्या भी सामने आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी एजेंसियों से भवन की जांच करवाई गई। IIT मंडी समेत तकनीकी एजेंसियों की जांच में भवन के कई महत्वपूर्ण स्ट्रक्चरल सदस्यों में खामियां सामने आईं। सुरक्षा को देखते हुए भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया।
चौदहवीं विधानसभा की स्थानीय निधि लेखा समिति ने सभापति विधायक संजय रत्न की अध्यक्षता में मामले की विस्तृत समीक्षा की। समिति ने निर्माण की गुणवत्ता, डिजाइन, अधिकारियों की भूमिका और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर विभागीय अधिकारियों से जवाब मांगा।
समिति ने सवाल उठाया कि जब तकनीकी जांच में भवन की गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर गंभीर कमियां सामने आ चुकी थीं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ समय रहते विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विजिलेंस ब्यूरो की FIR और अभियोजन स्वीकृति से जुड़े मामले में हिमुडा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के फैसले पर भी समिति ने नाराजगी जताई। समिति ने स्पष्ट किया कि किसी मामले में सामूहिक निर्णय लिए जाने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती।
निर्माण में सामने आई खामियों के मामले में समिति ने ठेकेदार की करीब 22 लाख रुपये की शेष राशि जब्त करने के निर्देश दिए हैं। इसमें करीब सात लाख रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट और 15 लाख रुपये का अंतिम भुगतान शामिल है। इसके अलावा ठेकेदार को दो साल के लिए सरकारी विभागों में ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
समिति ने पुराने भवन की रेट्रोफिटिंग और अन्य मदों में खर्च हुए करीब पांच करोड़ रुपये की भी जांच के निर्देश दिए हैं। जिम्मेदार सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार रिकवरी करने को कहा गया है।
अब पुराने भवन को इस्तेमाल करने के बजाय 104 विद्यार्थियों की क्षमता वाला नया छात्रावास बनाया जाएगा। इसके लिए कॉलेज के आसपास 30 दिन के भीतर जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं। जमीन तय होने के बाद 15 दिन में जियोटेक्निकल जांच पूरी करनी होगी।
करीब 1587 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनने वाले नए छात्रावास को सितंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए समिति ने हिमुडा के निर्माण कार्यों से पहले जियोटेक्निकल जांच, ढलान स्थिरता परीक्षण, स्वतंत्र डिजाइन जांच और थर्ड पार्टी निरीक्षण को अनिवार्य करने की सिफारिश की है।
उधर, नगर नियोजन एवं आवास मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि विधानसभा सचिवालय की ओर से पत्र प्राप्त हुआ है और उसका अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निधि लेखा समिति के निर्देशों पर कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



