नई दिल्ली: भारत तेजी से अपना सोना विदेशों से वापस ला रहा है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 880.52 टन सोने में से करीब 77% यानी लगभग 680 टन अब अपने देश में रखा गया है, जबकि 197.67 टन अभी भी बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास है। सिर्फ 6 महीने में 104.23 टन सोना वापस लाया गया है।

इकॉनमिक टाइम्स के मुताबिक, यह बदलाव रूसयूक्रेन युद्ध और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसे मामलों के बाद बढ़ते वैश्विक जोखिम से जुड़ा माना जा रहा है। अब सेंट्रल बैंक सोने को सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा के रूप में देख रहे हैं। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 16.7% हो गई है। पहले लंदन और न्यूयॉर्क जैसे केंद्रों में सोना रखना आसान और सुरक्षित माना जाता था।
विदेश में सोना क्यों?
विदेश में क्यों रखा जाता था सोना?
अब रणनीति क्यों बदल रही है?
1. वहां सोने की खरीदफरोख्त आसान और तेज होती है।
1. बदलते वैश्विक माहौल में जोखिम बढ़ गया है।
2. अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में सुविधा मिलती है। 2. विदेश में रखा सोना या संपत्ति राजनीतिक कारणों से फ्रीज हो सकती है।
3. वहां की संस्थाओं पर भरोसा ज्यादा था।
3. संकट के समय तुरंत उपयोग में लाना मुश्किल हो सकता है।
सोने के भंडार की स्थिति
रिजर्व बैंक की छमाही रिपोर्ट के अनुसार भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की स्थिति इस प्रकार बदली है:
घरेलू भंडार में वृद्धि हुई है। भारत के भीतर रखा सोना 575.8 मीट्रिक टन से बढ़कर 680 मीट्रिक टन हो गया है।
विदेशों से सोना वापस लाया जा रहा है। पिछले 6 महीनों में RBI ने 104.2 मीट्रिक टन सोना भारत मंगाया है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास सुरक्षित सोने की मात्रा 290.4 टन से घटकर अब 197.7 टन रह गई है।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी
सोने की कीमतों में भारी उछाल और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में गिरावट के कारण, कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की वैल्यू काफी बढ़ गई है:
सितंबर 2025 में सोने की वैल्यू 97.4 अरब डॉलर थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 115.4 अरब डॉलर हो गई।
कुल मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 13.9% से उछलकर 16.7% पर पहुंच गया है।
दुनिया भर में मची होड़
सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई अन्य देश भी विदेशी जोखिमों से बचने के लिए अपना सोना वापस मंगा रहे हैं:
फ्रांस: 2026 की शुरुआत में न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व से 129 टन सोना वापस पेरिस ले आया।
सर्बिया: जुलाई 2025 में अपना पूरा 6 अरब डॉलर का स्वर्ण भंडार वापस मंगा लिया।
जर्मनी: न्यूयॉर्क में रखे अपने 1,236 टन सोने की सुरक्षा को लेकर विचार कर रहा है।
वैश्विक रुझान: वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2025 तक 59% केंद्रीय बैंक अपना सोना अपने ही देश में रखना पसंद कर रहे हैं, जो 2020 में 50% था।



