हिमाचली खबर: पीएम नरेंद्र मोदी चार देशों की यात्रा के दूसरे दिन यूएई के बाद नीदरलैंड पहुंचे. यह उनकी दूसरी यात्रा है. इससे पहले पीएम जून 2017 में नीदरलैंड गए थे. उम्मीद की जा रही है कि इस यात्रा में दोनों देशों के बीच रक्षा, हरित हाइड्रोजन, नवाचार आदि क्षेत्रों में कई समझौते होंगे. पीएम मोदी की इस यात्रा के बहाने आइए जानते हैं कि यूरोप का छोटा सा देश नीदरलैंड कैसे खुद को मालामाल रखता है? आय के मुख्य स्रोत क्या हैं?

नीदरलैंड यूरोप का एक छोटा लेकिन बहुत ताकतवर देश है. जमीन कम है, लेकिन कमाई बहुत बड़ी है. इसी वजह से दुनिया के बड़े देश भी नीदरलैंड को गंभीरता से देखते हैं. कम शब्दों में कहना हो तो भी इसका जवाब कई हिस्सों में छिपा है. प्राकृतिक गैस, ट्यूलिप की खेती, ग्रीन हाउस फार्मिंग, रॉटरडैम बंदरगाह, दूध और डेयरी कारोबार, जल प्रबंधन और आधुनिक तकनीक इसकी कमाई की रीढ़ हैं. नीदरलैंड ने अपनी हर ताकत को कमाई में बदलने में सक्षम है. यही उसकी सबसे बड़ी सफलता है. विश्व बैंक के अनुसार, 2024 में नीदरलैंड की जीडीपी लगभग 1.23 ट्रिलियन डॉलर रही. आईएमएफ ने साल 2026 के लिए नीदरलैंड की जीडीपी लगभग 1.45 ट्रिलियन डॉलर आंकी है.
प्राकृतिक गैस ने दी बड़ी कमाई
नीदरलैंड की संपन्नता में प्राकृतिक गैस की भी बड़ी भूमिका रही है. यह देश लंबे समय तक यूरोप में गैस उत्पादन के लिए जाना जाता रहा. खास तौर पर ग्रोनिंगन गैस क्षेत्र ने नीदरलैंड को बहुत फायदा पहुंचाया. इस गैस ने देश को ऊर्जा दी. सरकार को राजस्व दिया. उद्योगों को ताकत दी और अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया. प्राकृतिक गैस से कमाई ने नीदरलैंड को बुनियादी ढांचे पर खर्च करने में मदद की. सड़कों, बंदरगाहों, तकनीक और सामाजिक सुविधाओं में निवेश हुआ. हालांकि, बाद में भूकंपीय चिंताओं के कारण गैस उत्पादन को सीमित करने की दिशा में कदम उठे, लेकिन यह सच है कि प्राकृतिक गैस ने देश की आर्थिक नींव मजबूत करने में बड़ा योगदान दिया.
नीदरलैंड की करंसी.
रॉटरडैम बंदरगाह से व्यापार की बारिश
नीदरलैंड की कमाई का एक और बड़ा स्रोत है रॉटरडैम पोर्ट. यह यूरोप के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त बंदरगाहों में शामिल है. दुनिया भर से जहाज यहां आते हैं. तेल आता है. गैस आती है. मशीनें आती हैं. खाद्य सामग्री आती है. यहीं से यह सामान यूरोप के दूसरे देशों तक पहुंचता है. इससे नीदरलैंड को भारी आर्थिक फायदा होता है. ट्रांसपोर्ट से कमाई होती है. गोदामों से कमाई होती है. लॉजिस्टिक्स कंपनियों को फायदा होता है. सरकार को टैक्स मिलता है. लाखों लोगों को काम मिलता है. यही वजह है कि नीदरलैंड को यूरोप का गेटवे भी कहा जाता है.
नीदरलैंड सबसे ज्यादा ट्यूलिप पैदा करने वाला देश है.
ट्यूलिप की खेती से दुनिया भर में पहचान
नीदरलैंड का नाम आते ही ट्यूलिप फूल याद आते हैं. ट्यूलिप यहां की पहचान है. यह सिर्फ सुंदरता का प्रतीक नहीं है. यह कमाई का बड़ा जरिया भी है. हर साल यहां लाखोंकरोड़ों फूल उगाए जाते हैं. दुनिया भर में निर्यात होता है. बगीचे, बल्ब, पौधे और कटफ्लावर का यहां बड़ा व्यापार है. इससे किसानों, व्यापारियों, निर्यातकों और पर्यटन क्षेत्र, सभी को फायदा होता है. ट्यूलिप के मौसम में दुनिया भर से पर्यटक भी नीदरलैंड पहुंचते हैं. इससे होटल, ट्रैवल, रेस्टोरेंट और स्थानीय बाजारों की आय बढ़ती है.यानी एक फूल यहां खेती भी है, व्यापार भी है और पर्यटन का साधन भी.
ट्यूलिप के मौसम में दुनिया भर से पर्यटक भी नीदरलैंड पहुंचते हैं.
ग्रीन हाउस खेती ने बदल दी तस्वीर
नीदरलैंड की बड़ी ताकत उसकी ग्रीन हाउस खेती है. यह खेती आधुनिक है. वैज्ञानिक है और बेहद लाभकारी भी. ग्रीन हाउस में तापमान नियंत्रित होता है. पानी की बचत होती है. कम जगह में ज्यादा उत्पादन होता है. फसल मौसम पर कम निर्भर रहती है. गुणवत्ता बेहतर रहती है. इसी तकनीक की वजह से नीदरलैंड बहुत कम जमीन पर भी बड़ी मात्रा में सब्जियां, फल, फूल और बीज पैदा करता है. टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, सलाद पत्ती और कई तरह के फूल यहां बड़े पैमाने पर उगाए जाते हैं. फिर इन्हें यूरोप और दुनिया के दूसरे बाजारों में भेजा जाता है. ग्रीन हाउस खेती से होने वाली आय ने नीदरलैंड को कृषि निर्यात में दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल कर दिया है.
खेती में विज्ञान, इसलिए कमाई भी ज्यादा
नीदरलैंड ने खेती को परंपरा के भरोसे नहीं छोड़ा. उसने खेती को विज्ञान से जोड़ा. यही उसकी असली ताकत है. यहां बेहतर बीज हैं. सेंसर आधारित सिंचाई है. डेटा आधारित खेती है. मशीनों का उपयोग है. कम पानी में ज्यादा उत्पादन है. यही कारण है कि यहां की कृषि सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा जरिया है. भारत जैसे देश के लिए यह मॉडल बहुत महत्वपूर्ण है. कम जमीन वाले किसान भी इससे सीख ले सकते हैं. ग्रीन हाउस, ड्रिप सिंचाई और हाईवैल्यू फसलों से आय बढ़ाई जा सकती है.
नीदरलैंड दूध, चीज, मक्खन और दूसरे डेयरी उत्पादों का बड़ा बाजार है.
डेयरी और फूड प्रोसेसिंग भी मजबूत
नीदरलैंड सिर्फ फूलों और सब्जियों का देश नहीं है. यह डेयरी कारोबार में भी बहुत मजबूत है. यहां दूध, चीज, मक्खन और दूसरे डेयरी उत्पादों का बड़ा बाजार है. ये उत्पाद दुनिया भर में निर्यात किए जाते हैं. फूड प्रोसेसिंग उद्योग भी मजबूत है. कच्चे उत्पाद को तैयार माल में बदला जाता है. फिर उसे ऊंचे दाम पर बेचा जाता है. यही तरीका कमाई को कई गुना बढ़ा देता है.
लड़कर नहीं, पानी को साधकर जीता
नीदरलैंड का बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे है यानी यहां पानी हमेशा चुनौती रहा है. लेकिन इस देश ने इस चुनौती को अवसर बना दिया. डैम बनाए. नहरें बनाई गईं. पंपिंग सिस्टम तैयार किए गए. समुद्र से जमीन बचाई गई. आज जल प्रबंधन भी नीदरलैंड की कमाई का जरिया है. दूसरे देश यहां से तकनीक सीखते हैं. कंसल्टेंसी मिलती है. इंजीनियरिंग सेवाएं दी जाती हैं यानी पानी से जुड़ी विशेषज्ञता भी यहां एक आर्थिक ताकत है.
नीदरलैंड ग्रीन हाउस फार्मिंग में भी आगे है.
भारत के लिए क्यों अहम है नीदरलैंड?
भारत और नीदरलैंड के रिश्ते केवल औपचारिक नहीं हैं. दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है. निवेश बढ़ रहा है. तकनीकी सहयोग भी मजबूत हो रहा है. भारत के लिए नीदरलैंड कई कारणों से अहम है. यूरोप के बाजार तक पहुंच, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स सहयोग, प्राकृतिक गैस और ऊर्जा क्षेत्र का अनुभव, ग्रीन हाउस खेती की तकनीक, फूलों और बीजों का व्यापार, जल प्रबंधन, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग, क्लीन टेक्नोलॉजी और नवाचार आदि के जरिए हमें बहुत कुछ मिल सकता है. यानी यह रिश्ता सिर्फ कूटनीति का नहीं, सीधा अर्थव्यवस्था का भी है.
दो लाख करोड़ का है द्विपक्षीय व्यापार
भारत और नीदरलैंड के बीच व्यापारिक रिश्ते बेहद मजबूत हैं. यूरोप में सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक है नीदरलैंड. दोनों देशों के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार लगभग 25 से 28 बिलियन डॉलर यानी करीब दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का है. नीदरलैंड, भारत के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बन गया है. भारत से मुख्य रूप से रिफाइंड ऑयल, एल्यूमिनियम और लोहे का सामान, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और दवाएं आदि निर्यात होता है. नीदरलैंड से आधुनिक मशीनरी और उपकरण, चिकित्सा उपकरण, केमिकल्स और प्लास्टिक उत्पाद, कृषि और डेयरी तकनीक आदि भारत तक पहुँचती हैं. भारत में निवेश करने वाला चौथा सबसे बड़ा निवेशक देश नीदरलैंड है. अच्छी बात यह है कि नीदरलैंड के साथ व्यापार में भारत का पलड़ा भारी रहता है यानी भारत वहां सामान भेजता ज्यादा है और मंगवाता कम है.
सरल शब्दों में कहें तो कहा जा सकता है कि छोटा सा देश नीदरलैंड दुनिया को एक बड़ा संदेश देता है. अगर उसके पास योजना हो, तकनीक हो और संसाधनों का सही उपयोग हो. नीदरलैंड सिर्फ यूरोप का एक सुंदर देश नहीं, बल्कि कमाई का स्मार्ट मॉडल भी है. यही कारण है कि भारत जैसे बड़े देश के लिए भी यह साझेदार बहुत अहम बन जाता है.



