Haryana News: हरियाणा के सोनीपत में वृद्धाश्रम में एक बुजुर्ग का दाह संस्कार कर दिया गया था. बुजुर्ग शिव चरण रत्न गुप्ता के बेटियां उनके अंतिम संस्कार में नहीं पहुंची थीं. उन्होंने वीडियो कॉल से ही पिता का अंतिम संस्कार देखा था. अब हरियाणा से ही रिश्तों को निष्ठुर कर देने वाली एक और दर्दनाक खबर सामने आई, जो बहुत विचलित करती है.

यहां वृद्धाश्रम में टीबी से पीड़ित एक बुजुर्ग को उसके घरवालों ने घर ले जाने से मना कर दिया. करनाल के सुभद्रा मानव कल्याण सेवा संस्थान में रह रहे 78 वर्षीय बुजुर्ग से मिलने 23 साल बाद उनका परिवार पहुंचा, लेकिन घर ले जाने से मना कर दिया. परिवार ने आश्रम संचालक से कहा किवो बीमार आदमी को साथ नहीं ले जा सकते, मर जाए तो बता देना, अंतिम संस्कार कर देंगे.
23 साल से अपने परिवार से अलग रह रहे थे बुजुर्ग
जानकारी के अनुसार करनाल के इस वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग पिछले करीब 23 साल से अपने परिवार से अलग रह रहे थे. उन्होंने 15 साल तक रिक्शा चालकर अपना पेट पाला. बाद में उम्र और बीमारी के कारण वो असहाय हो गए. ढलती उम्र और टीबी से पीड़ित होने की वजह से वो अपना गुजारा करने में असमर्थ हो गए थे. इसलिए करीब 6 महीने पहले आश्रम ने उन्हें अपने यहां शरण दी थी.
जब बुजुर्ग की तबियत खराब हुई तो आश्रम के जरिये उन्होंने अपने परिवार को बुलवाया. अपनी पत्नी, बेटे और बेटी को देखकर बुजुर्ग की आंखें भर आई. उन्होंने परिवार के सामने हाथ जोड़े और गुहार लगाई कि वो उनको अपने साथ ले चलें, लेकिन परिवार का दिल नहीं पिघला. परिजनों ने साफ कहा कि वह बीमार हैं और वो उनको अपने साथ नहीं ले जा सकते.
आश्रम में कराया जा रहा इलाज
परिजनों ने आश्रम संचालक को अपना नंबर देते हुए कहा कि अगर कुछ हो जाए तो बता देना. आश्रम के संचालक नीलू ने बताया कि उन्होंने परिजनों को समझाने की काफी कोशिश की. संचालक ने कहा कि यह समाज की एक कड़वा सच्चाई है, जहां अपने ही अपनों से मुंह फेर रहे हैं. फिलहाल बुजुर्ग का आश्रम में ही इलाज कराया जा रहा है और देखभाल की जा रही है.



