दिल्ली में अब जंतरमंतर पर प्रदर्शन नहीं किए जा सकेंगे. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच दिल्ली पुलिस ने जंतरमंतर को प्रदर्शन स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है. इसकी जगह अब रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड में प्रदर्शन किए जा सकेंगे. दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार की ओर से जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के मुताबिक, प्रदर्शन के लिए इन तीन जगहों को निर्धारित किया गया है. ऐसे में सवाल है कि संसद भवन से ये तीनों जगह कितनी दूर हैं और जंतरमंतर को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?

इन दूरियों से पता चलता है कि नए निर्धारित स्थलों में रामलीला मैदान संसद के सबसे नजदीक है. वहीं, बुराड़ी ग्राउंड संसद से सबसे दूर है. हालांकि, ये दूरियां किस आधार पर मापी गई हैं, इसे स्पष्ट करना जरूरी है.

जंतरमंतर को प्रदर्शन स्थल से क्यों हटाया गया?

जंतरमंतर को लेकर यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. 9 अक्टूबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने प्रदर्शन से पहले दिल्ली में ट्रेन और मेट्रो सेवाओं पर लगाई गई पाबंदियों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की थी. यह याचिका मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दाखिल की गई थी.

सुनवाई के दौरान CPI के महासचिव एमए बेबी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई, जबकि रामलीला मैदान को भी वैकल्पिक जगह के तौर पर स्वीकार नहीं किया गया. वकील प्रशांत भूषण ने भी कहा कि अगर जंतरमंतर पर अनुमति नहीं दी जा रही थी, तो प्रदर्शनकारियों को रामलीला मैदान में प्रदर्शन करने दिया जा सकता था.

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जंतरमंतर के आसपास शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि इस इलाके में सरकारी आवास और सांसदों के घर हैं. प्रदर्शनकारियों को शौचालय तक इस्तेमाल करने में परेशानी होती है. सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी जंतरमंतर पर आपातकालीन चिकित्सा सहायता पहुंचाने में कठिनाई का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि किसी प्रदर्शनकारी की तबीयत बिगड़ने पर एंबुलेंस को वहां पहुंचने में परेशानी हो सकती है.

तुषार मेहता ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य संसद की ओर मार्च करना था. संसद सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता का प्रतीक है. इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर वहां बिना अनुमति अनियंत्रित प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी जा सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिया था?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए बेहतर सुविधाओं वाली वैकल्पिक जगह तय करने के सुझाव पर विचार किया जाए. अदालत ने कहा कि ऐसी जगह होनी चाहिए, जहां प्रदर्शनकारियों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें. तुषार मेहता ने भी कहा था कि सक्षम प्राधिकारी इस पर फैसला लेगा और कपिल सिब्बल इस सुझाव पर सहमत थे. अदालत ने साथ ही दिल्ली में ट्रेन और मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद करने के बजाय उन्हें नियंत्रित तरीके से जारी रखने का निर्देश दिया था.

शिवराज सिंह चौहान ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से जब पूछा गया कि प्रदर्शन स्थल को जंतरमंतर से दूर क्यों किया गया, तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध करने का अधिकार है. हालांकि, कुछ लोग पूरी व्यवस्था को बंधक बनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है.