
इंदौर |28 अक्टूबर 2026| मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर की जेल के अंदर ही तैनात एक खाकीधारी प्रहरी द्वारा जेल के भीतर बंद कैदियों तक प्रतिबंधित और नशीला सामान चुपचाप पहुंचाने की कोशिश का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस प्रहरी की जिम्मेदारी जेल की सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की थी, वही खुद नियमों को ताक पर रखकर तस्करों की तरह कैदियों तक अवैध सामान पहुंचाने के काम में लिप्त पाया गया। इस घटना के सामने आने के बाद से जेल प्रशासन के भीतर हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई हैरान है कि आखिर जेल की चारदीवारी के अंदर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो सकती है।
मेन गेट पर हुई कड़ाई से चेकिंग
मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा वाकया सोमवार की रात को उस वक्त हुआ जब जेल के मुख्य गेट पर मुस्तैदी से चेकिंग चल रही थी। उस समय ड्यूटी पर उप जेलर राकेश उपाध्याय, चंद्रिका पटेल, नानूराम सोनी और विजय आर्य तैनात थे। रात के करीब 2 बजे जब जेल प्रहरी देवेंद्र चौहान अपनी ड्यूटी ज्वॉइन करने के लिए अंदर पहुंच रहा था, तो मुख्य गेट पर उसकी सामान्य तलाशी ली गई। इस दौरान जब संतरी को उसकी हरकतों और हाव-भाव पर शक हुआ, तो उसकी और अधिक सख्ती से तलाशी ली गई। जब प्रहरी के कपड़ों की बारीकी से जांच की गई, तो उसके अंडरगारमेंट्स, अंदरूनी कपड़ों और जूतों के अंदर बड़ी ही चालाकी से छिपाकर रखे गए बीड़ी और तंबाकू के कई पैकेट बरामद हुए, जिसे देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी सन्न रह गए।
सीसीटीवी की सख्त निगरानी में पकड़ा गया कारनामा
आपको बता दें कि यह पूरी तलाशी और जब्ती की कार्रवाई पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से जेल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की लाइव निगरानी में अंजाम दी गई थी, ताकि बाद में कोई लीपापोती न हो सके। पकड़े गए आरोपी प्रहरी देवेंद्र चौहान ने पूछताछ के दौरान यह कबूल किया है कि यह सारी प्रतिबंधित सामग्री उसे जेल के अंदर बंद एक कुख्यात कैदी तक पहुंचानी थी। इस पूरे खेल में द्वारकापुरी इलाके के एक कुख्यात नशा कारोबारी शुभम नेपाली का नाम भी सामने आ रहा है, जो फिलहाल इसी जेल में बंद है। हालांकि, शुरुआती दौर में चरस जैसे मादक पदार्थों के मिलने की भी चर्चाएं गर्म थी, लेकिन जेल अधीक्षक ने साफ कर दिया है कि चेकिंग के दौरान केवल बीड़ी और तंबाकू के पैकेट ही बरामद हुए हैं और चरस मिलने की बात में कोई सच्चाई नहीं है।
आरोपी प्रहरी तत्काल प्रभाव से निलंबित
इस गंभीर और शर्मनाक मामले की गंभीरता को समझते हुए जेल प्रशासन ने बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई का डंडा चलाया है। आरोपी जेल प्रहरी देवेंद्र चौहान को तत्काल प्रभाव से उसकी ड्यूटी से हटाते हुए सस्पेंड कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। शुरुआती पूछताछ में जो बातें छनकर सामने आ रही हैं, उनके मुताबिक प्रहरी को इस खतरनाक काम को अंजाम देने के एवज में बाहर से किसी ने बहुत मोटी रकम का लालच दिया था। थोड़े से पैसों के लालच में आकर इस प्रहरी ने न सिर्फ अपनी सरकारी नौकरी को दांव पर लगा दिया, बल्कि जेल के अंदर के सुरक्षा तंत्र को भी बुरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद से इंदौर जेल के भीतर के सुरक्षा प्रबंधों और अंदरूनी तालमेल पर बहुत बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आम जनता और जानकारों का मानना है कि जब जेल के रक्षक ही इस तरह कैदियों के मददगार बन जाएंगे, तब तो अपराधियों के भीतर से कानून का खौफ ही खत्म हो जाएगा। हालांकि, प्रशासन ने अब यह कसम खाई है कि इस मामले की तह तक जाकर इसके पीछे जुड़े बाकी चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा। जेल के मुख्य गेट से लेकर अंदर की बैरकों तक चेकिंग के नियमों को और ज्यादा सख्त कर दिया गया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी हरकत को समय रहते रोका जा सके।



