उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद जिले के मझोला थाना इलाके के सेक्टर15 स्थित समाजवादी आवास योजना के सैकड़ों परिवारों के लिए ‘विकास’ और ‘सुविधा’ के दावे महज कागजी साबित हो रहे हैं. पिछले एक सप्ताह से पूरी कॉलोनी भीषण गर्मी और उमस के बीच घुप अंधेरे में डूबी हुई है. इलाके का ट्रांसफार्मर खराब हो गया है , लेकिन विडंबना देखिए, जनता को राहत पहुंचाने के बजाय मुरादाबाद विकास प्राधिकरण और विद्युत विभाग अपनीअपनी फाइलों में उलझे हुए हैं, दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी का ‘टेनिस खेल’ चल रहा है.

जानकारी के मुताबिक, बिजली ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद मुरादाबाद विकास प्राधिकरण और विद्युत विभाग एक दूसरे पर काम को डाल रहे हैं. एक विभाग इसे मेंटेनेंस का हवाला देकर दूसरे के पाले में डाल रहा है, तो दूसरा हैंडओवर की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है. इस खींचतान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तंत्र में आपसी समन्वय की कितनी भारी कमी है. स्थिति यह है कि सात दिनों से बिजली गुल होने के कारण न केवल पंखेकूलर बंद हैं, बल्कि पानी की मोटर न चलने से पीने के पानी का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है. बच्चों, बुजुर्गों और बीमारों के लिए यह गर्मी जानलेवा साबित हो रही है. लेकिन जिम्मेदारों की कुर्सी के कागजी नियमों ने आम जनमानस को बंधक बना रखा है.
अंधेरे में रहने को मजबूर
समाजवादी आवास योजना में बिजली संकट अब एक मानवीय आपदा का रूप ले चुका है. स्थानीय निवासियों का आक्रोश चरम पर है, क्योंकि सात दिन बीत जाने के बाद भी अंधेरा छंटने का नाम नहीं ले रहा है. कॉलोनी के लोगों का कहना है कि जब बिजली का बिल समय पर भरा जाता है, तो संकट के समय विभाग मौन क्यों है? मुरादाबाद विकास प्राधिकरण का तर्क है कि बिजली आपूर्ति और बुनियादी ढांचा अब विद्युत विभाग की जिम्मेदारी है. जबकि, विद्युत विभाग का कहना है कि ट्रांसफार्मर की गारंटी और आजीवन रिप्लेसमेंट का अनुबंध MDA के पास है.
इस ‘तूतू मैंमैं’ के बीच मझोला का सेक्टर15 आज के आधुनिक दौर में भी लालटेन युग में जीने को मजबूर है. पानी की किल्लत ने महिलाओं की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है. सरकारी अमले की इस संवेदनहीनता ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि विभाग अपनी जवाबदेही से बचने के लिए किस हद तक जनता के हितों की बलि दे सकते हैं.
जेई ने क्या कहा?
बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर ने इस पूरे मामले पर विभाग का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि तकनीकी और संविदात्मक कारणों से ट्रांसफार्मर बदलने की जिम्मेदारी मुरादाबाद विकास प्राधिकरण की ही बनती है. जेई ने कहा कि यह ट्रांसफार्मर MDA की गारंटी अवधि और उनके विशिष्ट कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आता है. 15 प्रतिशत शुल्क पर जो कार्य होता है, उसमें आजीवन रिप्लेसमेंट और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी संबंधित विभाग यानी MDA की ही रहती है.



