गोवा पुलिस ने 11 अक्टूबर को राजधानी पणजी में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है. आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंदुत्व के खिलाफ नारे लगाए गए, जिससे हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की गई.

पणजी पुलिस निरीक्षक विजय कुमार चोडंकर के मुताबिक पणजी में आयोजित एक सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन के दौरान,कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों और समर्थकों ने ‘मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, हिंदुत्व मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए, जिससे धार्मिक असामंजस्य को बढ़ावा मिला और जानबूझकर हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची.

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस

उन्होंने कहा कि पुलिस ने धार्मिक असामंजस्य और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने के प्रयास के लिए भारतीय न्याय संहिता , 2023 की धारा 196 और 299 के तहत मामला दर्ज किया है.

‘सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास बर्दाश्त नहीं’

पहले राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा था कि घटना की जांच चल रही है और सरकार प्रदेश में सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा था कि जो लोग भी इस तरह की हरकत करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

रामप्रसाद केलकर की शिकायत पर FIR दर्ज

इस मामले में तालेगांव निवासी रामप्रसाद केलकर की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है. उन्होंने अपनी शिकायत में 11 अक्टूबर के प्रदर्शन का सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो देखने का हवाला दिया है. केलकर के मुताबिक CJP के सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. पार्टी ने देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने में कथित गड़बड़ियों को लेकर विरोध जताया था.

‘प्रदर्शनकारी हिंदुओं के खिलाफ नारे लगाए’

शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के लिए CJP की एक महिला संयोजक ने उत्तरी गोवा के कलेक्टर से अनुमति मांगी थी, लेकिन आवेदन खारिज कर दिया गया था. इसके बावजूद प्रदर्शन आयोजित किया गया. उन्होंने कहा कि आयोजकों ने इसे शांतिपूर्ण बताया था. हालांकि यह देखा गया कि प्रदर्शनकारी हिंदुओं के खिलाफ नारे लगा रहे थे जिससे पता चलता है कि यह विरोध प्रदर्शन समाज और इलाके में सद्भाव और शांति भंग करने के लिए आयोजित किया गया था.

हिरासत में लिए गए थे प्रदर्शनकारी

इधर जिला प्रशासन द्वारा CJP को विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार करने के बाद आजाद मैदान में प्रवेश करने पर पुलिस ने सात प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. बाद में, बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा 11 अक्टूबर की देर शाम को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया.