हिमाचली खबर: Puri Rath Yatra 2026 Date: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा देखने के लिए देशदुनिया से लोग ओडिशा  के पुरी शहर आते हैं। पूरे साल में यही वो पावन मौका होता है जब महाप्रभु नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस भव्य रथ यात्रा  का उत्सव पूरे 10 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। आपको बता दें कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में भगवान नारायण बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र जी और देवी सुभद्रा को रथ में विराजमान कर के जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार,  गुंडिचा  मंदिर भगवान जगन्नाथ का मौसी का घर है। तो आइए जानते हैं कि साल 2026 में यह पवित्र रथ यात्रा कब से शुरू होगी।

इस बार कब निकलेंगे महाप्रभु नगर भ्रमण पर? जानें पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की सही तिथि और महत्व​
इस बार कब निकलेंगे महाप्रभु नगर भ्रमण पर? जानें पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की सही तिथि और महत्व​

रथ यात्रा 2026 डेट

रथ यात्रा का उत्सव हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया का आरंभ 15 जुलाई को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर होगा। द्वितीया तिथि का समापन 16 जुलाई को सुबह 8 बजकर 52 मिनट पर होगा। इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी।  रथ यात्रा 16 जुलाई से प्रारंभ होकर 24 जुलाई को बहुदा यात्रा के साथ संपन्न होगी।

रथ यात्रा का महत्व

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जब निकलती है तब रथ को खींचने के लिए भारी संख्या में भक्तगण जुटते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ को खींचने वाले को 100 यज्ञ कराने के बराबर शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही कहा जाता है कि कहते हैं जो भी व्यक्ति जगन्नाथ जी की रथ यात्रा में शामिल होता है, उसे हर प्रकार की सुखसमृद्धि मिलती है और सभी कष्टों से भी छुटकारा मिल जाता है। आपको बता दें कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर में अधूरी मूर्तियों की पूजा की जाती है। यहां भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा की मूर्तियां काष्ठ यानी लकड़ियों की बनी हुई है।

रथ यात्रा से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

इन विशाल रथों को खींचने के लिए किसी भी जानवर का इस्तेमाल नहीं होता। रथों में लकड़ी के कृत्रिम घोड़े लगाए जाते हैं और इन्हें पूरी तरह से भक्तों द्वारा रस्सियों के सहारे खींचा जाता है।  रथ यात्रा के रथों के निर्माण में लोहे या किसी अन्य धातु का उपयोग वर्जित है, इसलिए बिना एक भी कील के ये रथ तैयार किए जाते हैं। आपको बता दें कि भगवान जब रथ यात्रा के लिए निकलते हैं तो पूरे मार्ग को सोने की झाड़ू से साफ किया जाता है।