हिमाचली खबर: Moradabad crime news: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहां पाकबड़ा थाने की पुलिस ने कानूनव्यवस्था बनाए रखने के नाम पर ऐसी कार्रवाई कर दी, जिससे लोग अचंभे में हैं. पुलिस ने एक ऐसे शख्स के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की रिपोर्ट अदालत में भेज दी, जिसकी दो वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी थी.

‘क्या भूत देगा गवाही…’ मर चुके शख्स की कोर्ट में लगी पुकार, खुल गई पुलिसकर्मियों की फर्जीवाड़े की पोल, सस्पेंड​
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मामला पाकबड़ा थाना क्षेत्र की नई बस्ती, कैलसा रोड का है. यहां दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. इसी विवाद को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की. मामले की जांच कर रहे उपनिरीक्षक विनीत कुमार ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि उन्होंने 28 मार्च 2026 को मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की, स्थानीय स्तर पर जांच की और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए.

दरोगा ने रिपोर्ट में गलत नाम रखा

दरोगा की रिपोर्ट में प्रथम पक्ष से दिनेश, उसकी पत्नी पूनम, भाई नरेश और नरेश की पत्नी रज्जो के नाम शामिल किए गए थे. वहीं दूसरे पक्ष से सदन, मंजू, जाह्नवी और साक्षी को नामजद किया गया था. रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों पक्षों से क्षेत्र की शांति व्यवस्था को खतरा है, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है.

मामले की सुनवाई के लिए जब एसडीएम कोर्ट में तारीख आई तो दिनेश और उसका परिवार अदालत में उपस्थित हुआ. सुनवाई के दौरान अदालत के अर्दली ने जब “नरेश हाजिर हों” की आवाज लगाई, तब पूरे मामले का चौंकाने वाला सच सामने आ गया. नरेश की पत्नी रज्जो और उसके भाई ने अदालत को बताया कि नरेश की दो वर्ष पहले बीमारी के कारण मौत हो चुकी है.

यह जानकारी सामने आते ही अदालत में मौजूद लोग भी हैरान रह गए. सवाल यह उठने लगा कि जब व्यक्ति की मृत्यु दो साल पहले हो चुकी थी, तो पुलिस ने उसका नाम रिपोर्ट में कैसे शामिल कर लिया. इतना ही नहीं, जांच अधिकारी ने यह भी दावा किया था कि उसने संबंधित व्यक्ति के बयान दर्ज किए हैं. मामले को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा.

दरोगा को सस्पेंड किया गया

वहीं मुरादाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी दरोगा विनीत कुमार को निलंबित कर दिया. एएसपी अभिनव द्विवेदी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं. यह घटना पुलिस की जांच प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े करती है. अब विभागीय जांच में यह पता लगाया जाएगा कि यह महज लापरवाही थी या फिर जांच में जानबूझकर तथ्यों की अनदेखी की गई.