दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. मस्जिद के संरक्षण और वहां बिना किसी बाधा के आनेजाने की अनुमति देने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह रुख अपनाया. याचिकाकर्ता सैयद अहमद सऊद ने मस्जिद को गिराए जाने की आशंका जताते हुए उसके संरक्षण की मांग की थी.

जस्टिस अनिश दयाल की पीठ के सामने हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया कि जब तक सरकार वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधित्व पर निर्णय नहीं ले लेती, तब तक मस्जिद परिसर में कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी. याचिका में मस्जिद की सुरक्षा सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं को वहां बेरोकटोक आनेजाने की अनुमति देने की मांग की गई थी. हालांकि, अदालत ने मस्जिद में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी.

मामले में अब वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधित्व पर केंद्र सरकार के फैसले पर नजर रहेगी. फिलहाल, केंद्र के आश्वासन से मस्जिद को तोड़े जाने की आशंका के बीच तत्काल राहत मिली है.

हाई कोर्ट में क्या दी गई दलीलें?

सुनवाई के दौरान CGSC आशीष दीक्षित ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली वक्फ बोर्ड की ओर से दिए गए आवेदन पर जल्द से जल्द यानी चार सप्ताह के भीतर फैसला ले लिया जाएगा. इस बीच, हम कोई कार्रवाई नहीं करेंगे. याचिकाकर्ता को यह याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं है और अगर कई नमाजी कोर्ट आने लगें, तो इससे एक नई मुसीबत खड़ी हो जाएगी. हालांकि, याचिकाकर्ता सैयद अहमद सऊद की ओर से पेश वकील एम सुफियान सिद्दीकी ने इस दलील पर आपत्ति जताई. अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी.

पिछली सुनवाई में याचिकाकर्ता ने क्या कहा?

पिछली सुनवाई में सिद्दीकी ने कहा था कि मस्जिद को गिराए जाने का खतरा बना हुआ है. उन्होंने कहा था कि आनेजाने के रास्ते में रुकावट पैदा की गई है, जिससे नमाजी मस्जिद के अंदर नहीं जा पा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड ने इस मुद्दे पर पर्याप्त कदम न उठाकर अपने कानूनी कर्तव्यों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है. सऊद का दावा है कि वह इस मामले से जुड़े हुए हैं क्योंकि उन्हें अपने धार्मिक अधिकारों का पालन करने का स्वतंत्र अधिकार है, लेकिन उन्हें मस्जिद में जाने से रोका जा रहा है. यह मस्जिद रेस कोर्स क्लब के अंदर स्थित है, जो 7 लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के पास लगभग 53 एकड़ में फैला हुआ है.