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राजस्थान के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है. जयपुर के पास बगरू में एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जा रही Cockroach Janta Party (CJP) की टीम पर शुक्रवार को हमला किए जाने का मामला सामने आया. टीम की अगुवाई पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका कर रहे थे.

टीम इस स्कूल का निरीक्षण करने इसलिए जा रही थी क्योंकि आरोप था कि यहां स्कूल एक गौशाला में चलाया जा रहा है. पिछले साल स्कूल की इमारत को असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था और उसमें प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी. इसके बाद छात्रों को पास ही एक अस्थायी जगह पर शिफ्ट कर दिया गया. आरोप है कि इसी अस्थायी परिसर में भैंसें भी रखी जाती हैं.

राजस्थान में कितने स्कूल बिना बिल्डिंग के चल रहे हैं?

हालांकि, राजस्थान में यह इकलौता स्कूल नहीं है, जहां बुनियादी ढांचे की समस्या है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी जयपुर में ही 38 सरकारी स्कूल बिना किसी भवन के चल रहे हैं. पूरे राजस्थान में ऐसे स्कूलों की संख्या 611 है.

कितने स्कूलों में नहीं है टॉयलेट?

इसके अलावा, राज्य में अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 स्कूल ऐसे हैं, जहां टॉयलेट की सुविधा नहीं है. वहीं 1,049 सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

शुक्रवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली के सवाल के जवाब में राजस्थान सरकार ने यह जानकारी दी. सरकार ने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2025-26 के यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 611 स्कूल ऐसे हैं जिनके पास अपना भवन नहीं है. इनमें 10 स्कूल बालिकाओं के लिए हैं.

किन जगहों पर कितने स्कूल बिना बिल्डिंग के चल रहे?

बिना भवन वाले स्कूलों की संख्या के मामले में झालावाड़ का अकलेरा ब्लॉक सबसे आगे है. यहां 23 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं. इसके बाद झालावाड़ के ही खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 ऐसे स्कूल हैं. शीर्ष पांच में फलोदी का बाप ब्लॉक 11 स्कूलों के साथ और बांसवाड़ा का छोटीसरवन ब्लॉक 10 स्कूलों के साथ शामिल हैं.

बालिकाओं के लिए बने बिना भवन वाले स्कूलों की बात करें तो इनमें दो-दो स्कूल जयपुर और अलवर में हैं. इसके अलावा बाड़मेर, चूरू, डूंगरपुर, करौली, कोटा और राजसमंद में एक-एक बालिका स्कूल बिना भवन के चल रहा है.

किन जगहों पर टॉयलेट नहीं?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के अपने भवन वाले 64,484 सरकारी स्कूलों में से 2,047 में टॉयलेट की सुविधा नहीं है. टॉयलेट की सुविधा के मामले में सबसे खराब स्थिति उन जिलों में है, जहां आदिवासी आबादी ज्यादा है. बांसवाड़ा 188 स्कूलों के साथ सबसे ऊपर है. इसके बाद डूंगरपुर में 124 और उदयपुर में 98 स्कूल ऐसे हैं, जहां टॉयलेट की सुविधा नहीं है. इनके बाद बीकानेर में 84, झालावाड़ में 81 और जैसलमेर में 79 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें टॉयलेट की सुविधा नहीं है.

1,049 स्कूलों में पीने का पानी नहीं..

सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा का आंकड़ा भी चिंता बढ़ाने वाला है. राज्य में 1,049 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है. दौसा में ऐसे स्कूलों की संख्या सबसे ज्यादा 96 है. इसके बाद उदयपुर में 70, अलवर में 65, करौली में 60 और बांसवाड़ा में 58 स्कूल हैं जहां पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

पहले भी स्कूल का निरीक्षण कर चुके हैं रांका?

CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने 14 अगस्त को अलवर के एक स्कूल का दौरा किया था. इस स्कूल के छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू किया था, क्योंकि स्कूल के एक खाली कमरे की छत का एक हिस्सा गिर गया था. बगरू के स्कूल का दौरा भी इसी तरह स्कूलों की जमीनी स्थिति और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आरोपों की जांच के लिए किया जा रहा था.

सरकार ने 550 करोड़ रुपये मरम्मत के लिए रखे

राजस्थान सरकार ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की भी जानकारी दी है. सरकार के मुताबिक बजट घोषणा के तहत स्कूलों की मरम्मत और नवीनीकरण पर 550 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके अलावा ऐसे स्कूलों के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिनके पास अपना भवन नहीं है या जो जर्जर इमारतों में चल रहे हैं. इस राशि से नए भवनों का निर्माण किया जाएगा. सरकार ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत राज्य के सरकारी स्कूलों में भवन, टॉयलेट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है.

पांच साल में 12,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना

सरकार के मुताबिक, प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक के ऐसे स्कूल भवनों के नए निर्माण, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल 2,500 करोड़ रुपये उपलब्ध होंगे. इस तरह पांच वर्षों में कुल 12,500 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाएगी. यह राशि उन स्कूल भवनों पर खर्च की जाएगी जो जर्जर स्थिति में हैं और जिनकी मरम्मत या नए निर्माण की जरूरत है.

राज्य सरकार ने बताया कि हर साल मिलने वाली 2,500 करोड़ रुपये की राशि के लिए कई स्रोतों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इनमें District Mineral Foundation Trust (DMFT), Samagra Shiksha, राज्य निधि, VB G-RAM-G, सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि, SDRF और CSR आदि शामिल हैं.

नेता प्रतिपक्ष ने सरकार की योजना पर क्या उठाए सवाल?

नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पिछले साल हुए एक ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के पास स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कोई योजना नहीं है.

जूली के मुताबिक, राज्य में 3,768 सरकारी स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं और उन्हें इस्तेमाल के लिए असुरक्षित घोषित किया गया है. इन स्कूलों को सरकार ने बंद कर दिया या वहां पढ़ने वाले छात्रों को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया. उनका दावा है कि इससे स्कूलों में छात्रों के नामांकन में भी कमी आई है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 83,783 कमरे पूरी तरह जर्जर और इस्तेमाल के लिए असुरक्षित हैं.