
नई दिल्ली: सरकारी बैंक की नौकरी को अक्सर सुरक्षित और अच्छी सैलरी वाले करियर के तौर पर देखा जाता है। लेकिन पश्चिम बंगाल की 31 वर्षीय मधुरिमा के लिए बैंक की नौकरी का अनुभव बेहद मुश्किल रहा। स्थिति यह थी कि वह कई बार वॉशरूम तक नहीं जा पाती थीं। बाद में उन्होंने वह नौकरी छोड़ दी। इसके लिए उन्हें बड़ी रकम चुकानी पड़ी।
मधुरिमा ने करीब दो साल तक IBPS परीक्षा की तैयारी के बाद बैंक में नौकरी हासिल की, जहां उन्हें 70,000 रुपये प्रति माह इन-हैंड सैलरी मिलती थी। हालांकि लंबे काम के घंटे, छुट्टी न मिलना और काम के दौरान ब्रेक लेने में परेशानी के चलते उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया। नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये की बॉन्ड पेनल्टी भी चुकानी पड़ी।
रोज 12 घंटे से ज्यादा काम का दावा
मधुरिमा ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि बैंक में काम के दौरान वह रोजाना काफी तनाव में रहती थीं। उनके मुताबिक, कई बार काम का समय सुबह 8:30 बजे से रात 10:30 बजे के बाद तक चला जाता था। रविवार को भी काम करना पड़ता था। उन्होंने अपने अनुभव को बताते हुए कहा कि वह काम के बाद रोज रोती थीं। उनके मुताबिक, कई बार छुट्टी की मांग भी स्वीकार नहीं की जाती थी।
घंटों वॉशरूम नहीं जा पाती थीं
मधुरिमा ने बताया कि कैशियर की जिम्मेदारी के दौरान उन्हें लंबे समय तक कैश काउंटर पर बैठे रहना पड़ता था। ग्राहकों का काम सुबह करीब 10 बजे शुरू होता था और दोपहर तक लगातार चलता रहता था। उनका दावा है कि कई बार वह कई घंटों तक ब्रेक नहीं ले पाती थीं। साथ ही काम के दौरान काफी देर तक वॉशरूम भी नहीं जा पाती थीं। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक ब्रेक न मिलने के कारण उन्हें UTI (Urinary Tract Infection) की समस्या हो गई।
शादी के बाद ही लौटना पड़ा ट्रेनिंग पर
मधुरिमा ने बताया कि उन्होंने दिसंबर 2022 में शादी की थी, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद उन्हें ट्रेनिंग के लिए वापस जाना पड़ा। उनके मुताबिक, शादी के बाद वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ ज्यादा समय नहीं बिता सकीं।
उन्होंने बैंक में शामिल होने से पहले मास्टर डिग्री पूरी की थी और करीब दो साल तक IBPS परीक्षा की तैयारी की। अक्टूबर 2022 में उनका चयन सरकारी स्वामित्व वाले बैंक में हुआ और उन्हें ग्रामीण कर्नाटक की एक शाखा में पोस्टिंग मिली। नौकरी के साथ करीब 9 महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग भी थी।
नौकरी के साथ अतिरिक्त टारगेट
मधुरिमा के मुताबिक, कैश काउंटर की जिम्मेदारी के अलावा उन्हें नए ग्राहक जोड़ने और अकाउंट खोलने जैसे अतिरिक्त काम भी दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि कई बार कैश काउंटर बंद करने के बाद उन्हें बाहर जाकर ग्राहकों से संपर्क करने के लिए कहा जाता था। उनके मुताबिक, जिस गांव में उनकी पोस्टिंग थी, वहां वह कन्नड़ भाषा नहीं जानती थीं। ऐसे में ग्राहकों से संपर्क करना उनके लिए और मुश्किल हो जाता था।
अभी कहां हैं मधुरिमा?
मधुरिमा इस समय बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी में जॉब कर रही हैं। नई नौकरी की शुरुआत में उन्हें बैंक की तुलना में आधी सैलरी मिली। मधुरिमा के मुताबिक नई कंपनी में काम का माहौल बेहतर था। उन्होंने बताया कि उनके मैनेजर ने उन्हें काफी सपोर्ट किया। अब उनकी सैलरी 60 हजार रुपये प्रति महीने हो गई है।



