पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र के पोथमा पर गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने गए 5 साल के बच्चे की सांप के डसने से मौत हो गई. मृतक की पहचान टुनटुन महतो के पुत्र इशु कुमार के रूप में हुई है. परिजन ने आंगनबाड़ी सहायिका पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है.

परिजनों के मुताबिक, घटना करीब 11 बजे की है. इशु कुमार आंगनबाड़ी केंद्र में पढ़ने गया था. भोजन करने के बाद वह केंद्र के पास स्थित चापाकल पर हाथ धोने गया. इसी दौरान उसकी हाथ की उंगली में सांप ने काट लिया. बच्चे ने सांप के काटने की जानकारी आंगनबाड़ी सहायिका को दी.
परिजनों का आरोप है कि बच्चे की हालत को देखते हुए उसे तुरंत अस्पताल ले जाने या उसके परिवार को सूचना देने के बजाय सहायिका ने उसे पैदल घर जाने के लिए कह दिया. आंगनबाड़ी केंद्र से बच्चे का घर करीब 50 मीटर की दूरी पर बताया जा रहा है. बच्चा अकेले पैदल घर पहुंचा और अपनी मां को सांप के काटने की जानकारी दी.
झाड़फूंक के लिए ले गए
बच्चे के सांप के काटे जाने की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों की सलाह पर परिजन उसे आननफानन में बड़हिया लेकर गए. वहां पहले झाड़फूंक कराई गई. परिजनों के अनुसार, पुजारी ने बच्चे को मृत बता दिया. इसके बाद परिवार उसे बड़हिया के एक अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने भी उसे मृत घोषित कर दिया.
इसके बाद परिजन बच्चे को इलाज के लिए शेखपुरा के एक अस्पताल लेकर पहुंचे. वहां भी डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया. इसके बाद उसे अनुमंडलीय अस्पताल बाढ़ लाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मौत की पुष्टि की.
आंगनबाड़ी केंद्र पर लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्र मध्य विद्यालय बेढना में संचालित होता है. वहां कई शिक्षक और आंगनबाड़ी सहायिका मौजूद रहते हैं. इसके बावजूद सांप के काटने के बाद बच्चे को तत्काल अस्पताल नहीं ले जाया गया. परिजनों का यह भी कहना है कि घटना की जानकारी परिवार को देने के बजाय बच्चे को अकेले घर भेज दिया गया.
परिवार का आरोप है कि यदि बच्चे को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जाता तो उसकी जान बच सकती थी. घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है और वे आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं.
मामले में आंगनबाड़ी केंद्र की कथित लापरवाही को लेकर संबंधित अधिकारियों का पक्ष जानने की कोशिश की गई. इस संबंध में सीडीपीओ से फोन पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया.
रिपोर्ट रवि शंकर



