Indore News: इंदौर की सेंट्रल जेल में डेंगू के मामले सामने आने के बाद जेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. जेल में करीब 30 कैदियों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है. इनमें से तीन कैदियों की डेंगू जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. वहीं, कुछ अन्य कैदियों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. करीब 2 हजार कैदियों के जेल में बंद होने के कारण प्रशासन संक्रमण को लेकर विशेष सावधानी बरत रहा है.

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया सर्वे
डेंगू के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम सेंट्रल जेल पहुंची. टीम ने जेल में बंद कैदियों का स्वास्थ्य सर्वे किया. जिन कैदियों में बुखार या डेंगू जैसे लक्षण मिले, उनके सैंपल लिए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार ऐसे कैदियों पर नजर रख रही है, जिनमें बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं.
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तीन कैदियों में डेंगू की पुष्टि
जानकारी के मुताबिक, अब तक तीन कैदियों की डेंगू जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. इन कैदियों का इलाज किया जा रहा है और उनकी सेहत पर नजर रखी जा रही है. वहीं, अन्य संदिग्ध कैदियों की जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और साफ होगी. प्रशासन का प्रयास है कि अगर किसी अन्य कैदी में डेंगू की पुष्टि होती है तो उसका समय पर इलाज शुरू किया जा सके.
जेल में करीब 2 हजार कैदी
इंदौर सेंट्रल जेल में करीब 2 हजार कैदी बंद हैं. इतनी बड़ी संख्या में कैदियों के एक ही परिसर में रहने के कारण डेंगू के संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ गई है. यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. बुखार या डेंगू के लक्षण वाले कैदियों की पहचान कर उनकी जांच कराई जा रही है.
मच्छरों के लार्वा खत्म करने पर जोर
डेंगू से बचाव के लिए जेल परिसर में मच्छरों के लार्वा को खत्म करने के लिए दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है. इसके साथ ही साफसफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. परिसर में पानी जमा न हो और मच्छरों को पनपने का मौका न मिले, इसके लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
संक्रमण रोकने के लिए निगरानी बढ़ी
स्वास्थ्य विभाग की टीम जेल परिसर में लगातार निगरानी कर रही है. कैदियों में बुखार और डेंगू जैसे लक्षणों की जांच की जा रही है. पॉजिटिव पाए गए कैदियों के इलाज और उनकी स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है. प्रशासन का फोकस डेंगू के संक्रमण को फैलने से रोकने, मच्छरों के लार्वा को खत्म करने और संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान करने पर है.



