क्या आप भी रात भर करवटे बदलते रहते हैं? सदियों पुराना यह आयुर्वेदिक फॉर्मूला बदल देगा आपकी रातें।

कुछ लोग दिनभर भागदौड़ करते हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें रात में नींद नहीं आती। यह समस्या आम होती जा रही है जिसका कारण ज्यादातर मामलों में कोई बीमारी नहीं बल्कि तनाव और स्क्रीन टाइम होता है। अगर आप अपने खराब लाइफस्टाइल, स्ट्रेस और स्क्रीन टाइम की वजह से रात में सो नहीं पा रहे हैं तो इनके लिए एक बार सदियों पुराने पारंपरिक ‘स्लीप रिचुअल्स’ ट्राई करके देखें।
भारत के पारंपरिक ‘स्लीप रिचुअल्स’ जो देंगे सुकून भरी नींद
आयुर्वेद नींद न आने की समस्या से निपटने के लिए पैरों की मालिश और कांसा थाली थेरेपी को फायदेमंद मानता है। इसे पुरानी चिकित्सा तकनीक में पादाभ्यंग नाम दिया गया है। आइए जानते हैं कैसे ये पारंपरिक ‘स्लीप रिचुअल्स’ शरीर को आराम देकर गहरी और सुकून भरी नींद दिला सकते हैं:
पादभ्यंग
आयुर्वेदिक तौर तरीकों में पैरों की मालिश के लिए हर्बल तेलों को उपयोग में लाया जाता है, जिनसे पैरों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और शरीर विश्राम अवस्था में आने लगता है। चाहें तो तिल के तेल से भी मालिश की जा सकती है।
कैसे करें?
- सबसे पहले सोने से पहले अपने पैर धोकर उन्हें सूती कपड़े से पोंछ लें।
- अब घी, तिल का तेल या आयुर्वेदिक हर्बल तेल हाथों पर लगाएं।
- हल्के हाथ से पैरों पर दबाव देते हुए कम से कम 15 मिनट तक मालिश करनी है।
- मालिश के बाद पैरों पर तेल लगा रहने दें और सो जाएं।
- अगली सुबह गुनगुने पानी से अपने पैरों को धोने के बाद नहाएं।
कांस्य थाली थेरेपी
इस थेरेपी में कांसे, तांबे, जस्ते और टिन से बनी छोटी कटोरी या थाली का पैरों की मालिश में उपयोग किया जाता है। कांस्य थाली थेरेपी से नर्वस सिस्टम उत्तेजित होता है और ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा रहता है। इतना ही नहीं, नियमित रूप से यह मसाज करने से पैरों को मजबूती भी मिलती है।
कैसे करें?
- अपने पैरों को अच्छे से धोकर उसे तौलिए से पोंछ लें। ये समाचार आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे है।
- इसके बाद तलवों में घी, नारियल या तिल का तेल लगाएं।
- अब कांसे की कटोरी या लोटा लें और उससे तलवों पर हल्के हाथ से प्रेशर दें।
- मालिश के बाद आप पैरों को कम से कम 2 घंटे बाद धोएं या फिर अगली सुबह गुनगुने पानी से साफ कर लें।
पैरों में मालिश के फायदे
पैरों की मालिश से नींद की समस्या ही दूर नहीं होती, इससे और भी कई फायदे मिलते हैं:
- घुटनों, पैरों और एड़ियों के दर्द में आराम
- अनिद्रा की समस्या दूर
- दिनभर की थकान से राहत
- तनाव में कमी
- तीनों दोषों वात, पित्त और कफ को संतुलित करे
- पाचन में सुधार
- आंखों की थकान और काले घेरे कम करे
- वैरिकोज वेंस की समस्या का समाधान



