सोमवार की तेजी और मंगलवार को सधी हुई शुरूआत. किसी ने भी ये अनुमान नहीं लगाया था कि सुबह 10 बजकर 30 के बाद अगले दो घंटों में शेयर बाजार अपने दिन के लोएस्ट प्वाइंट को अच कर ​जाएगा. दोपहर 12 बजकर 30 मिनट के आसपास सेंसेक्स और निफ्टी दिन के पीक से काफी नीचे आ चुके थे. खासकर सेंसेक्स में 600 से ज्यादा अंकों की गिरावट देखने को मिल चुकी है. इसका मतलब है कि बीएसई का प्रमुख सूचकांक दिन के पीक से 600 से ज्यादा अंकों के नीचे आ चुका था. जिसकी वजह से शेयर बाजार निवेशकों को 3.74 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो गया.

शेयर बाजार में कैसी आई आफत, निवेशकों ने 120 मिनट में गंवाई 3.74 लाख करोड़ की दौलत
शेयर बाजार में कैसी आई आफत, निवेशकों ने 120 मिनट में गंवाई 3.74 लाख करोड़ की दौलत

वास्तव में आरबीआई के ईसीएल पर लिए फैसले, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, रुपए में गिरावट, निफ्टी का एक्सपायरी पोड और जियो पॉ​लिटिकल टेंशन ये वो तमाम बातें हैं जिनकी वजह से शेयर बाजार में एक ​बार फिर से गिरावट देखने को मिल रही है. जानकारों की मानना है कि एक दिन पहले सनफार्मा की डील और रिलायंस के शेयरों ने शेयर बाजार को उठाने में मदद की थी. लेकिन आज बैंकिंग सेक्टर खासकर सरकारी बैंकों के शेयर बाजार की गिरावट की अगुवाई कर रहे हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर शेयर बाजार में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं. साथ ही वो कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है.

शेयर बाजार में गिरावट

मंगलवार को शेयर बाजार में संभली हुई शुरुआत की और कारोबारी सत्र के दौरान सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर दिन के पीक पर भी दिखाई दिए. लेकिन अगले दो घंटों में रिवर्स गियर लग गया और 12 बजकर 30 मिनट के आसपास सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दिन के लोअर लेवल पर दिखाई दिए. पहले बात बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स की करें तो 77,094.79 अंकों के साथ मामूली गिरावट के साथ ओपन हुआ.

लेकिन कुछ ही देर बाद इसमें तेजी आनी शुरू हुई और सुबह 10 बजकर 30 मिनट में 77,493.53 अंकों के साथ दिन के पीक पर पहुंच गया. लेकिन उसके बाद सेंसेक्स ने फिर रिवर्स गियर लगा दिया. आंकड़ों को देखें तो सेंसेक्स दोपहर 12 बजकर 30 मिनट के आसपास 76,876.86 अंकों के साथ दिन के लोअर लेवल पर दिखाई दिया. इसका मतलब है कि सेंसेक्स अपने दिन के पीक से 616.67 अंकों तक टूट गया.

वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी कुछ तरह की चाल चलता हुआ दिखाई दिया. निफ्टी 24,049.90 अंकों पर ओपन हुआ और कुछ ही देर में 24,181.80 अंकों के साथ दिन के हाई पर पहुंच गया. लेकिन बाद में इसमें भी गिरावट देखने को मिली और 23,992.30 अंकों के लोअर लेवल पर दिखाई दे रहा है वैसे दोपहर 1 बजका 30 मिनट में निफ्टी करीब 97 अंकों की गिरावट के साथ 24,005.15 अंकों पर कारोबार कर रहा है. जानकारों की मानें तो शेयर बाजार में आने वाले दिनों में उतार चढ़ाव की स्थिति बनी रह सकती है.

बाजार में गिरावट के मुख्य कारण

  1. प्रॉफिट बुकिंग: लगातार दूसरे सत्र में बढ़त जारी रहने की उम्मीद के बावजूद, दोनों इंडेक्स में प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिली. फाइनेंशियल, IT और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई. सोमवार को, पिछले सप्ताह की भारी गिरावट के बाद, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी शेयरों में आई तेजी की बदौलत सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने लगातार तीन सत्रों से चली आ रही गिरावट के सिलसिले को तोड़ दिया था.
  2. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी: ब्रेंट क्रूड 0.99 प्रतिशत बढ़कर 109.3 USD प्रति बैरल पर पहुंच गया. तेल की कीमतें बढ़ने से भारत के लिए आयात की लागत बढ़ जाती है, व्यापार घाटा और चौड़ा हो जाता है, और महंगाई पर दबाव पड़ता है. जिसका सीधा असर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ता है.
  3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को 1,151.48 करोड़ रुपए के शेयर बेचे. विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार बिकवाली से बाज़ार में लिक्विडिटी कम हो जाती है और शेयरों की कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है.
  4. कमजोर वैश्विक संकेत: एशियाई बाज़ार, जिनमें जापान का निक्केई 225, शंघाई का SSE कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग शामिल हैं, गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे. वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स भी लाल निशान में थे, जो अमेरिकी बाज़ारों की कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहे थे.
  5. एक्सपायरी से जुड़ी अस्थिरता: निफ्टी की एक्सपायरी का दिन होने के कारण, बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली, क्योंकि ट्रेडर्स अपनी पोजीशन को एडजस्ट या रोल ओवर करते हुए दिखाई दिए, जिससे इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कीमतों में तेजी से उतारचढ़ाव आया.
  6. जियो पॉ​लिटिकल टेंशन: वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी निवेशकों के मूड को प्रभावित किया. एक अमेरिकी अधिकारी ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोके बिना संघर्ष समाप्त करने के नवीनतम प्रस्ताव को स्वीकार करने की संभावना कम है. साथ ही, कूटनीतिक वार्ताओं के कैंसल होने से संघर्ष के जल्द समाधान की उम्मीदें भी धूमिल हो गई हैं.
  7. बैंकिंग शेयरों में गिरावट: भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी असेट क्लासिफिकेशन और प्रोविजनिंग के अंतिम नियमों के बाद बैंकिंग इंडेक्स में 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. ये नियम 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे और इनसे सरकारी बैंकों के लिए प्रोविजनिंग की आवश्यकताएं बढ़ने की उम्मीद है.