हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से वृद्धावस्था पेंशन योजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। रोहड़ू क्षेत्र की तागनू-जांगलिख पंचायत में कथित तौर पर कम उम्र के लोगों को सरकारी रिकॉर्ड में बुजुर्ग दिखाकर सालों तक पेंशन का लाभ दिलाया गया। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, जिला कल्याण विभाग को शिकायत मिली थी कि पंचायत क्षेत्र में कई लोगों की उम्र सरकारी दस्तावेजों में बढ़ाकर उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद जब रिकॉर्ड की जांच की गई तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच पंचायत रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्रों में कथित तौर पर बदलाव किए गए। इसके जरिए 44 से 54 साल उम्र के लोगों को बुजुर्ग दिखाकर पेंशन के लिए पात्र बनाया गया।
जांच में करीब 45 संदिग्ध लाभार्थियों की पहचान की गई है। इनमें तांगणू गांव के 20 और जांगलिख गांव के 25 लोग शामिल बताए जा रहे हैं। सूची में 26 पुरुष और 19 महिलाएं हैं। हैरानी की बात यह है कि कुछ लोग वर्ष 2018-19 से ही पेंशन का लाभ ले रहे थे, जबकि कुछ नाम बाद में जोड़े गए।
आरोप है कि पंचायत के परिवार रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर उम्र बढ़ाई गई, ताकि संबंधित लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिल सके। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में इस तरह की गड़बड़ियों की चर्चा लंबे समय से चल रही थी।
मामले में पुलिस ने थाना चिड़गांव में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस और कल्याण विभाग की टीमें अब पंचायत रिकॉर्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन और सत्यापन दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
अधिकारियों को शक है कि बिना मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर रिकॉर्ड में बदलाव संभव नहीं था। इसी कारण पंचायत के कुछ पूर्व कर्मचारियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और पंचायत स्तर पर दस्तावेजों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।