सावधान हिमाचल! अगले 72 घंटे भारी, कई जिलों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट; आंधीतूफान भी सताएगा

बारिश और आपदा से 3219 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बारिश में कमी के बीच अब प्रदेश के कई हिस्सों में दोबारा तेज बारिश और आंधी का दौर शुरू होने की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 26 से 28 सितंबर के बीच प्रदेश के कई इलाकों में मौसम खराब रह सकता है। इस दौरान कुछ जिलों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं।

मौसम विभाग ने 26 सितंबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर आंधी के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अगले दिन यानी 27 सितंबर को मौसम और ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना है।

इस दिन सिरमौर जिले के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं मंडी, शिमला, सोलन और किन्नौर में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। इन जिलों में करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने के साथ भारी बारिश हो सकती है।

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ऐसे में लोगों को खुले इलाकों, पेड़ों और कमजोर ढांचों के आसपास सावधानी बरतने की जरूरत होगी। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क बाधित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

मौसम विभाग के मुताबिक 25 सितंबर को प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। अधिकतर इलाकों में दिन के समय धूप खिलने का अनुमान है।

इसके बाद 26 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं और 28 सितंबर तक प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

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प्रदेश में मौसम की मार का असर सड़क नेटवर्क पर भी दिखाई दे रहा है। राज्य में अभी 42 सड़कें बंद हैं और इन्हें खोलने के लिए संबंधित विभागों की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बारिश और भूस्खलन की आशंका के बीच आने वाले दिनों में सड़क व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में सफर करने वालों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी जा सकती है।

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हिमाचल प्रदेश इस मानसून सीजन में भारी बारिश, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से पहले ही बड़ा नुकसान झेल चुका है। 30 जून से 24 सितंबर के बीच भूस्खलन में 18, डूबने की घटनाओं में 17 और गिरने की घटनाओं में 56 लोगों की मौत दर्ज की गई है। राज्य में अब तक 3219 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान बताया गया है। इस दौरान 100 पक्के और 43 कच्चे मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं।