Himachal Cabinet Expansion News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर स्थिति उलझती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लगातार मीडिया के सामने जल्द कैबिनेट विस्तार की बात दोहराते रहे हैं, लेकिन पार्टी की प्रदेश प्रभारी रजनी पाटिल के हालिया बयान ने इस पूरे मामले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रजनी पाटिल ने साफ किया है कि मुख्यमंत्री की तरफ से इस संबंध में कोई भी औपचारिक प्रस्ताव संगठन के पास नहीं आया है।

उनके इस वक्तव्य के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कैबिनेट विस्तार में हो रही देरी की मुख्य वजह क्या है और क्या प्रस्ताव न भेजने के पीछे स्वयं मुख्यमंत्री का रुख जिम्मेदार है। राजधानी शिमला में में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान प्रभारी रजनी पाटिल ने स्पष्ट रूप से कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी जब मुख्यमंत्री अपनी ओर से कोई लिखित या औपचारिक प्रस्ताव भेजेंगे।

जब उनसे कुल्लू के विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने गेंद मुख्यमंत्री के पाले में डालते हुए कहा कि इस संदर्भ में जानकारी स्वयं मुख्यमंत्री ही दे सकते हैं। उल्लेखनीय है कि सीएम सुक्खू ने 11 अगस्त को शिमला में सार्वजनिक तौर पर कहा था कि हाईकमान की अनुमति मिलते ही विस्तार कर दिया जाएगा और सुंदर सिंह ठाकुर किसी भी समय मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। सीएम ने आगामी पीएसी (PAC) बैठक से पहले भी शपथ की बात कही थी।

इसके अलावा, 25 सितंबर को सोलन दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने पुनः संकेत दिए थे कि सरकार के 4 साल का कार्यकाल 11 दिसंबर को पूरा होने से पहले खाली पड़े एक कैबिनेट पद और एक डिप्टी स्पीकर पद को भरने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने विभागों में फेरबदल की आवश्यकता पर भी जोर दिया था। हालांकि, रजनी पाटिल के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार और पार्टी संगठन के स्तर पर इस विषय पर आधिकारिक कागजी कार्रवाई या समन्वय स्थापित नहीं हो सका है।

कैबिनेट विस्तार के इस राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ‘मिशन 2027’ की तैयारियों में भी जुट गई है। शिमला में दो दिनों तक चली संगठनात्मक बैठकों में 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया गया, लेकिन इन बैठकों में पार्टी के भीतर ब्लॉक और जिला स्तर पर गहराता मतभेद भी सामने आया है।

प्रभारी रजनी पाटिल ने स्वीकार किया कि बैठकों के दौरान लगभग 90 प्रतिशत जिला अध्यक्षों ने शिकायत दर्ज कराई है कि ब्लॉक अध्यक्ष उनकी बात नहीं सुनते। हालांकि, उन्होंने इस खींचतान को पारिवारिक मामला बताते हुए खारिज किया और कहा कि सरकार व संगठन में कोई टकराव नहीं है, लेकिन किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

संगठनात्मक मजबूती के साथ ही कांग्रेस ने राज्य में पेपर लीक मामले को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का ऐलान किया है। रजनी पाटिल ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की वजह से 70 से 80 छात्रों ने आत्महत्या की, हालांकि उन्होंने इस आंकड़े का कोई स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। इसके साथ ही, राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की तर्ज पर हिमाचल में भी युवाओं के बीच जाने की योजना बनाई जा रही है।

प्रेस वार्ता में रजनी पाटिल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर भी बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उसे ‘चोर आयोग’ तक कह दिया और भाजपा के साथ मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए। ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराते हुए कांग्रेस ने सोमवार को पूरे प्रदेश के सभी जिलों में ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस दौरान उन्होंने हरियाणा और महाराष्ट्र चुनावों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारी पैमाने पर वोटों की गड़बड़ी की गई है।