मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों को मिली कानूनी छूट के खिलाफ याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों को नोटिस भेजा है. देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि इसी तरह का एक मामला पहले से लंबित है. हमारी बस यही गुजारिश है कि अब और याचिकाएं दाखिल करना बंद करें, वरना दलीलें कभी पूरी नहीं हो पाएंगी और मामले दाखिल करने की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि सभी बिंदुओं को पहले ही पूरी तरह से शामिल कर लिया गया है. इस तरह तो हम कभी भी मुख्य मुद्दे पर ध्यान नहीं दे पाएंगे. आज भी एक दूसरे मामले में हमने यही बात कही थी. अभी हमारे सामने यही स्थिति आ रही है कि मामले आते ही रहते हैं और फिर उनका कोई अंत ही नहीं होता.
RJD नेता मनोज झा ने दायर की याचिका
दरअसल, यह नोटिस राष्ट्रीय जनता दल सांसद मनोज झा और वकील अरुण कुमार अग्रवाल की ओर से दायर याचिकाओं पर जारी किया गया है. इन याचिकाओं में ‘मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 16 को चुनौती दी गई है. इससे पहले इसी तरह की ADR की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस भेजा था. याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त व चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के पालन के दौरान किए गए कामों के लिए मिली छूट यानी इम्युनिटी को चुनौती दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को 18 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया. याचिकाओं में कहा गया है कि यह धारा असंवैधानिक है, EC को दी गई शक्तियों के दायरे से बाहर है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह संविधान के ‘मूल ढांचे’का उल्लंघन करती है. याचिकाओं में कहा गया है, ‘इस अधिनियम की धारा 16 संवैधानिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र को रोकती है और ‘न्यायिक समीक्षा’ की शक्ति में हस्तक्षेप करती है, जिसे संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा माना गया है.”
सुप्रीम कोर्ट में क्या दी गईं दलीलें?
अरुण कुमार अग्रवाल की ओर से कोर्ट में पेश हुईं वकील नेहा राठी ने कहा कि इस प्रावधान को सीधे पढ़ने से साफ होता है कि किसी भी कोर्ट में CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कामकाज के दौरान किए गए किसी काम, कार्रवाई या कही गई बात को लेकर दीवानी या आपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता. यह सुरक्षा उन लोगों को भी मिलती है जो पहले CEC या चुनाव आयुक्त रह चुके हैं.
याचिकाकर्ता अग्रवाल की ओर से दलील दी गई कि धारा 16 को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि इसमें बहुत व्यापक सुरक्षा दी गई है. इसके तहत भ्रष्टाचार, जालसाजी और दूसरे गंभीर अपराधों में भी मुकदमा चलाने पर रोक लगती है. यह छूट जीवनभर के लिए है और उन कामों पर भी लागू हो सकती है, जो कानूनी अधिकारों के दायरे से बाहर किए गए हों.



