हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों की सरगर्मियों के बीच सोलन जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और चुनाव अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। कुनिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी के दौरान दो बैलेट पेपर रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए। मामला सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सहायक रिटर्निंग अधिकारी (ARO) समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई।
बैलेट पेपर लेखन के दौरान सामने आई गड़बड़ी
जानकारी के अनुसार कुनिहार ब्लॉक मुख्यालय में पंचायत चुनावों के लिए पोस्टल बैलेट और बैलेट पेपर तैयार करने का काम चल रहा था। अलग-अलग पंचायतों के लिए मतपत्रों की छपाई और रिकॉर्ड संभालने की जिम्मेदारी कर्मचारियों को सौंपी गई थी।
इसी दौरान ग्राम पंचायत खनलग के वार्ड नंबर-4 के प्रधान पद के लिए जारी किए गए दो बैलेट पेपर रिकॉर्ड से गायब पाए गए। जब अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच की तो क्रम संख्या 5265669 और 5265670 वाले दो मतपत्र नहीं मिले।
मामला सामने आते ही मच गया हड़कंप
दो बैलेट पेपर गायब होने की खबर मिलते ही चुनाव ड्यूटी में लगे अधिकारियों के होश उड़ गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उच्च अधिकारियों को सूचना दी गई।
प्रशासन ने बिना देरी किए शुरुआती जांच शुरू की और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए कड़ी कार्रवाई कर दी।
ARO समेत 8 कर्मचारियों पर FIR
बीडीओ कुनिहार तन्मय कंवर ने पुलिस थाना कुनिहार में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके बाद सहायक रिटर्निंग अधिकारी समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
साथ ही इन सभी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से चुनाव ड्यूटी से हटा दिया गया है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि यह सिर्फ लापरवाही थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है।
पुलिस कई एंगल से कर रही जांच
पुलिस अब संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है और रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। डीएसपी अशोक चौहान ने बताया कि बैलेट पेपर गायब होने की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि यह घटना महज लापरवाही का नतीजा थी या फिर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश।
पंचायत चुनाव से पहले बढ़ी प्रशासन की टेंशन
इस घटना ने पंचायत चुनावों की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
माना जा रहा है कि अब प्रशासन पंचायत चुनावों के दौरान निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और ज्यादा सख्त कर सकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।