सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पटियाला और मोगा जिलों के 50 म्युनिसिपल वार्ड में हुए चुनावों को रद्द कर दिया है. कोर्ट द्वारा नियुक्त एक फैक्टफाइंडिंग कमीशन ने पाया कि नॉमिनेशन प्रोसेस में बड़े पैमाने पर रुकावटें डाली गई थीं. इसमें उम्मीदवारों को नॉमिनेशन फाइल करने से रोकना, उनके साथ मारपीट करना, उन्हें धमकाना और उनके नॉमिनेशन पेपर छीनना या नष्ट करना शामिल था.

इसके अलावा यह भी कहा गया कि इन सुझावों को मान लिया गया है और संबंधित 50 वार्डों में नए सिरे से चुनाव कराने के निर्देश जारी किए गए हैं. दोबारा चुनाव की पूरी प्रक्रिया छह हफ्तों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए. बेंच ने 28 सितंबर के एक आदेश में ये बातें कहीं, जिसे कल रात अपलोड किया गया था.

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस निर्मलजीत कौर की अध्यक्षता वाले एकसदस्यीय फैक्टफाइंडिंग कमीशन की रिपोर्ट को स्वीकार किया. साथ ही प्रभावित वार्ड में नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया. यह मामला पंजाब में म्युनिसिपल चुनावों को चुनौती देने से जुड़ा था.

याचिकाकर्ताओं ने लगाए थे गंभीर आरोप

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सत्ताधारी पार्टी के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों ने उम्मीदवारों को नॉमिनेशन फॉर्म जमा करने से रोका. इसके लिए उन्होंने मारपीट की, कपड़े फाड़े और नॉमिनेशन पेपर छीन लिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नॉमिनेशन प्रोसेस की ऑडियोविजुअल रिकॉर्डिंग नहीं की गई थी.

SC ने जांच के लिए जस्टिस को किया था नियुक्त

सुप्रीम कोर्ट ने पहले इन विवादित दावों की जांच के लिए जस्टिस निर्मलजीत कौर को नियुक्त किया था. कमीशन ने हलफनामों, आधिकारिक जवाबों, वीडियो और CCTV फुटेज, तस्वीरों, वोटर रजिस्टर और वोटर लिस्ट की जांच की. साथ ही, चुनाव अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, सिविल अधिकारियों, चुनाव ऑब्जर्वर और दावा करने वालों के बयान भी दर्ज किए.