राजस्थान निकाय चुनाव में जहां कांग्रेस के ज्यादा पार्षद, वहां भी BJP के मेयर, 7 में 6 पर कब्जा

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के बाद सोमवार को मेयर और चेयरमैन के चुनाव में कई जगह चौंकाने वाले नतीजे सामने आए। जिन शहरों में पार्षदों के आंकड़े कांग्रेस के पक्ष में दिखाई दे रहे थे, वहां भी कांग्रेस अपना बोर्ड बनाने में कामयाब नहीं हो सकी। अजमेर और पाली इसका बड़ा उदाहरण रहे। वहीं, बीकानेर में कांग्रेस ने मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाकर भाजपा को झटका दिया। कुल मिलाकर 7 नगर निगमों में से 6 में भाजपा के मेयर बने, जबकि कांग्रेस को केवल बीकानेर नगर निगम में सफलता मिली।

अजमेर में कांग्रेस के ज्यादा पार्षद, फिर भी BJP की अनामिका मेयर
अजमेर नगर निगम में कांग्रेस के पास भाजपा से ज्यादा पार्षद होने के बावजूद भाजपा की अनामिका शर्मा मेयर बन गईं। अनामिका शर्मा को चुनाव में 43 वोट मिले। खास बात यह है कि भाजपा के सिर्फ 32 पार्षद चुनाव जीतकर आए थे। इसके बावजूद उन्हें 43 वोट मिले। इससे साफ है कि मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम रही।

पाली में भी कांग्रेस की बढ़त काम नहीं आई
पाली नगर निगम में भी ऐसा ही राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। यहां भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर चुनी गईं। उन्हें 33 वोट मिले, जबकि भाजपा के 21 पार्षद ही जीतकर आए थे। दूसरी ओर कांग्रेस की सुमित्रा जैन को महज 3 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के पास 29 पार्षद थे। पाली का परिणाम इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि पार्षदों के आंकड़े और मेयर चुनाव का नतीजा पूरी तरह अलग दिखाई दिया।

बीकानेर में कांग्रेस ने पलटा खेल
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने अपनी स्थिति मजबूत करते हुए मेयर की कुर्सी हासिल कर ली। पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे और कांग्रेस नेता अनिल कल्ला मेयर चुने गए। इस जीत के साथ कांग्रेस ने प्रदेश के 7 नगर निगमों में अपना एकमात्र मेयर बनाया।

उदयपुर-अलवर में भी BJP का कब्जा
उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी मेयर चुने गए। सिंघवी ने कहा कि कार्यभार संभालने के दूसरे दिन से ही उदयपुर में बदलाव दिखाई देने लगेगा। उन्होंने अगले चुनाव में नगर निगम को कांग्रेस मुक्त करने का प्रयास करने की बात भी कही।

अलवर में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने जीत दर्ज की। उन्हें 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले।

शिक्षा मंत्री के भाई को कांग्रेस प्रत्याशी ने हराया
बारां की अटरू नगर पालिका में चुनाव का परिणाम भी चर्चा में रहा। यहां शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी दिलावर को कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने महज 3 वोट से हरा दिया। यह मुकाबला स्थानीय राजनीति में खासा चर्चित रहा।

32 निकायों में निर्विरोध चुने गए अध्यक्ष
राजस्थान के 309 शहरी निकायों में से 32 निकायों में निर्विरोध चुनाव हो चुके हैं। इनमें भरतपुर और भीलवाड़ा नगर निगम के मेयर के अलावा 6 नगर परिषद सभापति और 24 नगरपालिका अध्यक्ष शामिल हैं। वहीं तीन नगर निगम समेत चार निकायों में 25 सितंबर को चुनाव होंगे।

अजमेर में वोटिंग से पहले हंगामा
अजमेर नगर निगम परिसर के बाहर मेयर चुनाव से पहले हंगामा हो गया। कांग्रेस के पूर्व देहात अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह मेयर पद की दावेदार किरण गढ़वाल को लेकर निगम पहुंचे। उनके निगम परिसर में प्रवेश को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सोनी समेत अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। इसके बाद पुलिस अधिकारी भूपेंद्र सिंह को बाहर लेकर गए।

51 लाख के ऑफर का आरोप
केकड़ी नगर पालिका में चुनाव से पहले भाजपा ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अनिल मित्तल ने भाजपा पार्षद राजेंद्र चौधरी को फोन कर 51 लाख रुपए के बदले कांग्रेस के पक्ष में वोट देने का ऑफर दिया। इस मामले में सामने आए वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

मंगलवार को डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष के चुनाव
मेयर और अध्यक्ष के बाद मंगलवार को 305 शहरी निकायों में उपाध्यक्ष, उपसभापति और डिप्टी मेयर के चुनाव होंगे। इनमें 7 नगर निगमों में डिप्टी मेयर, 47 नगर परिषदों में उपसभापति और 251 नगरपालिकाओं में उपाध्यक्ष चुने जाएंगे।

श्रीगंगानगर में फायरिंग के आरोप से हड़कंप
श्रीगंगानगर के श्रीविजयनगर में तीन पार्षदों पर फायरिंग और उन्हें उठा ले जाने के आरोप सामने आए हैं। कांग्रेस नेताओं ने वार्ड 20 के मंगतराम, वार्ड 21 के प्यारेलाल और वार्ड 13 के निर्दलीय पार्षद विजय कुमार के साथ घटना होने का आरोप लगाया। परिजन पुलिस थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

अंता में कांग्रेस का बोर्ड, सिर्फ एक वोट से जीत
बारां की अंता नगर पालिका में कांग्रेस के प्रदीप नागर अध्यक्ष चुने गए। उन्होंने भाजपा के धनराज चौरसिया को सिर्फ एक वोट से हराया। नागर को 18 वोट मिले। यहां कांग्रेस और भाजपा के 16-16 पार्षद जीते थे, जबकि 3 निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका में रहे। इनमें दो निर्दलीयों ने कांग्रेस और एक ने भाजपा के पक्ष में वोट किया। इसके साथ ही अंता में चौथी बार कांग्रेस का बोर्ड बन गया।