Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। यह मामला श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि एसआईटी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

ट्रस्ट की ओर से चोरी, गबन और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जानकारी के मुताबिक, एफआईआर में आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें रमाशंकर यादव , अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष और करुणेश समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं।
FIR में चंपत राय का नाम नहीं
गौरतलब है कि ट्रस्ट द्वारा दर्ज कराए गए इस मुकदमे में महासचिव , अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं हैं। जबकि विपक्षी दल पिछले कुछ समय से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर इन्हीं नामों को निशाने पर लेते हुए सवाल उठा रहे हैं।
किस धारा में कितनी सजा का प्रावधान?
- धारा 316 : आपराधिक न्यासभंग से जुड़ा गंभीर अपराध। यह उन मामलों में लागू होती है, जहां किसी व्यक्ति को भरोसे के तहत सौंपी गई संपत्ति, धन या संसाधनों का गबन अथवा दुरुपयोग किया जाता है। दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
- धारा 317 : ऐसी संपत्ति को जानबूझकर खरीदना, रखना या उसका कारोबार करना, जिसके चोरी की होने की जानकारी हो। यदि कोई व्यक्ति आदतन ऐसा करता पाया जाता है तो उसे आजीवन कारावास या 10 वर्ष तक की जेल और जुर्माना हो सकता है।
- धारा 317 : चोरी की संपत्ति को छिपाने, बेचने, नष्ट करने या ठिकाने लगाने में सहायता करना, जबकि उसकी चोरी की प्रकृति की जानकारी हो। इस अपराध में 3 वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
- धारा 61: आपराधिक साजिश से संबंधित प्रावधान। इसमें दो या अधिक व्यक्तियों द्वारा किसी गैरकानूनी कार्य या अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया समझौता शामिल होता है।
- धारा 3 : जब कई लोग एक समान उद्देश्य के तहत मिलकर अपराध करते हैं तो इस धारा के तहत सभी की सामूहिक जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
जल्द हो सकती है गिरफ्तारी
सबसे अहम बात यह है कि किसी बाहरी व्यक्ति की शिकायत के बजाय स्वयं ने इस मामले में पहल करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। ट्रस्ट के इस सख्त कदम के बाद मामला अब औपचारिक आपराधिक जांच के दायरे में आ गया है। ऐसे में जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की संभावना भी बढ़ गई है।



